फार्म पौण्ड निर्माण के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

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अजमेर,  (कासं)। राज्य सरकार ने किसानों से फार्म पौण्ड निर्माण के आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  कृषि आयुक्तालय द्वारा इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए गए है। किसानों को आवेदन करने के लिये नये दिशा-निर्देश का इन्तजार नहीं करना पड़ेगा। कृषि उपनिदेशक वी.के.शर्मा ने बताया कि फॉर्म पोण्ड आवेदन के लिए कृषकों के नाम एक स्थान पर न्यूनतम कृषि योग्य जोत भूमि आधा हैक्टेयर का स्वामित्व होना आवश्यक है। अनुदान के लिए प्रस्तुत जमाबंदी की नकल छह माह से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। योजना में कृषकों को एक बार ही लाभान्वित करने का प्रावधान है।

कृषक नजदीकी ई मित्र केन्द्र पर जाकर ऑन लाईन आवेदन कर सकता हैं। कृषक को दस्तावेजो के रूप में जमाबंदी की नकल, ट्रेस नक्शा, पासपोर्ट साईज फोटो, आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड, कृषक श्रेणी प्रमाण पत्र, फव्वारा/ड्रिप का प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक ले जाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष के दिशा-निर्देशानुसार ही फार्म पौण्ड निर्माण पूर्व की सभी औपचारिकताएं पूरी की जानी है। गत वर्ष फार्म पौण्ड निर्माण पर अधिकतम 63000 हजार रूपए अनुदान राशि देय थी। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी से चर्चा कर नजदीकी ई-मित्र कियोस्क पर जाकर  ऑन-लाईन आवेदन कर सकता है। पात्र कृषकों को संबंधित सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) से फार्म पौण्ड निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जायेगी।

इसके उपरान्त ही कृषक नियमानुसार फार्म पौण्ड निर्माण करायेंगे। गत वर्ष जिले में कुल 664 फार्म पौण्ड का निर्माण हुआ था। उन्होंने बताया कि खेत में वर्षा जल के बहाव क्षेत्र में अथवा खेत के निचले हिस्से में होना चाहिए। फार्म पौण्ड हेतु काली व भारी संरचना मिट्टी वाली भूमि सर्वाेत्तम होती हैं, क्योकि इसमें पानी का रिसाव कम होता है। फार्म पौण्ड में ढलान 1:1 प्रतिशत का तथा निकलने वाली मिट्टी 1-1 मीटर का गेप देकर मेडबंदी करनी चाहिए। वर्षा जल को एकत्रित कर सिंचाई के कार्य में लेने हेतु कृषकों के लिए फार्म पौण्ड निर्माण कार्य प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कराया जाता है।

शर्मा ने बताया कि यह फसल उत्पादन बढाने में प्रभावकारी एवं काफी कारगर हैं। वर्षा जल को फार्म पौण्ड में एकत्रित कर जीवन रक्षक फसल सिंचाई हेतु संरक्षित किया जाता हैं। फार्म पौण्ड का निर्माण कृषकों द्वारा उनकी निजी खातेदारी भूमि पर करवाया जाता हैं, इससे वर्षा का जल बहकर व्यर्थ नहीं जायेगा, खेत का पानी खेत में रहेगा।  भूमि में जल स्तर बढेगा और पर्यावरण में भी सुधार होगा। फार्म पौण्ड निर्माण खेत में वर्षा जल को संरक्षित करने का सबसे सुलभ तरीका है।  इससे उत्पादकता में वृद्घि होगी।
 

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