बच्चों को अनुशासन सिखाते वक्त कभी भी न करें ये गलतियां

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हर माता-पिता का बच्चों को पालने और उन्हें सही-गलत सिखाने का अपना अलग तरीका होता है। इतना ही नहीं, बच्चे अगर गलती करते हैं तो उन्हें अनुशासन सिखाने और सजा देने का तरीका भी हर माता-पिता का अलग होता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आप बच्चे को आंख दिखाएं, डांट दें, बाद में कोई सरप्राइज देने का लालच भी दें लेकिन बच्चा आपकी बात सुनना बंद कर देता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि हो सकता है बच्चे को अनुशासन सिखाते वक्त आप कुछ गलतियां कर रहे हों.. 

पब्लिक में लोगों के सामने न चिल्लाएं
अगर आप बच्चे के साथ किसी मॉल में, पार्क में या फिर किसी पब्लिक प्लेस में हैं और बच्चा कोई गलती कर देता है तो आप क्या करते हैं? क्या आप पब्लिक प्लेस पर ही सभी लोगों के सामने बच्चे पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं? अगर आपका जवाब हां तो आप यह गलती कर रहे हैं। जब पब्लिक प्लेस पर अनजान लोगों के सामने आप बच्चे पर चिल्लाते हैं तो बच्चा आप क्या कह रहे हैं इस बात पर फोकस नहीं करता बल्कि वह इस बात से परेशान हो जाता है कि आस-पास के लोग आपकी बातें सुन रहे हैं। लिहाजा पब्लिक में लोगों के सामने बच्चे पर चिल्लाने की बजाए अकेले में बच्चे से उसके व्यवहार के बारे में बात करें। 

बच्चे को घूस देने की कोशिश न करें 
अगर घर से बाहर निकलते ही बच्चा नखरे दिखाने लगे और बदमिजाजी करने लगे तो उससे सही व्यवहार करने के लिए क्या आप बच्चे को घूस देते हैं। जैसे-आइसक्रीम का लालच या फिर किसी खिलौने का। अगर हां तो आप बच्चे को गलत संदेश दे रहे हैं क्योंकि आगे चलकर वह सही व्यवहार करने के बदले भी आपसे अपनी डिमांड को पूरा करवाने की कोशिश करेगा। 

जरूरत से ज्यादा रिएक्ट न करें 
अगर आप बच्चे की किसी छोटी सी गलती पर इतनी जोर-जोर से चिल्लाने लगते हैं कि आप बच्चे की बात और उसकी आवाज भी नहीं सुन पा रहे हैं तो यह आपकी सबसे बड़ी गलती है क्योंकि जब बच्चों से चिल्लाकर कोई बात कही जाती है तो वे उसे सुनने की बजाए या तो आपकी ही तरह चिल्लाकर बिहेव करने लगते हैं या फिर आपकी बातें पूरी तरह से सुनना बंद कर देते हैं। लिहाजा बच्चे को अनुशासन बनाने के लिए चिल्लाने की बजाए सजा देने की बता कहकर डराएं। 

अपना गुस्सा बच्चे पर न निकालें
अगर आपका दिन ऑफिस में सही नहीं रहा या फिर किसी और वजह से आप स्ट्रेस में हैं और आप देखते हैं कि बच्चे ने कोई गलती कर दी है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अपना सारा गुस्सा बच्चे पर निकाल दें। बच्चे को अनुशासन सिखाते वक्त अपने गुस्से को अलग रखें। 

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