जानिए नवरात्रि में क्या है अष्टमी का महत्व और किस विधि से होती है पूजा

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चैत्र नवरात्रि का आठंवा दिन जिसे दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्र के इस आठवें दिन का खास महत्व माना जाता है। कुछ पौराणिक कथाओं की मानें तो एक दुर्गम नामक राक्षस था जिसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था। बेहद शक्तिशाली होने के कारण देवता तक उसका सामना नहीं कर पा रहे थे। परेशान हुए देवता कैलाश पर्वत पर भगवान शिव से मिलने पहुंचे जहां उन्होंने इस राक्षस के बारे में बताया। भगवान शिव ने  ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवताओं के साथ मिलकर एक मार्ग निकाला। सब देवी-देवताओं के सहयोग से शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी दुर्गा का जन्म हुआ। उसके बाद सभी देवी-देवताओं ने मां दुर्गा को अपने-अपने शस्त्र दिये। जिससे माता दुर्गा ने उस शक्तिशाली दानव का वध कर दिया। और फिर इसी दिन को दुर्गा अष्टमी के रूप में जाना जाने लगा।

अष्टमी पूजा की विधि

  • सबसे पहले तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। उसके बाद माता के लिए भोग तैयार करें। भोग में हल्वा, पूड़ी और काले चने बनाए जाते हैं।
  • फिर माता की फोटो पर चुनरी चढ़ाएं और फूल अर्पित करें।
  • माता की आरती के लिए कपूर, दीपक, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि तैयार कर लें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माता के मंत्रो का उच्चारण करें।
  • माता के भोग में पांच फल, किशमिश, सुपारी, पान, लौंग, इलायची आदि का प्रयोग करें।

कैसे करें कन्या पूजन

  • इस दिन 2 से लेकर 10 साल की उम्र की बच्चियों का पूजन किया जाता है। हर उम्र की कन्या के पूजन करने के अलग अलग फायदे मिलते हैं। और इस कन्या पूजन में अक बालक का होना भी अनिवार्य माना गया है।कन्याओं का पूजन घर या आस-पास के किसी मंदिर में भी किया जा सकता है।
  • कन्या पूजन के लिए सबसे पहले तो कन्याओं के पैर धो लें। पैर धोने के बाद माथे पर तिलक लगाएं।
  • कन्याओं के हाथों में कलावा बांधे। उसके बाद उन्हें भोजन कराएं। भोजन में हलवा, पूड़ी और काले चने का विशेष महत्व माना गया है।
  • भोजन के बाद कन्याओं को उपहार देकर उनके पैर छुएं। उसके बाद कन्याओं से आशीर्वाद प्राप्त करें।

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