प्रधानमंत्री समेत कई दिग्गजों का सियासी भविष्य तय करेगा पूर्वांचल

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लखनऊ, रविवार, 24 मार्च 2019। सियासी लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में पूरब का चुनावी रण इस बार देश की राजनीति के लिये निर्णायक साबित होगा। खुद में 26 लोकसभा सीटों को समेटे पूर्वांचल पर इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत बड़े—बड़े छत्रपों का राजनीतिक भविष्य टिका है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा पूर्वांचल इस वक्त भाजपा का सबसे मजबूत किला है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में चली  मोदी लहर ने इस पूरे इलाके से विपक्षी दलों का लगभग सफाया कर दिया और आजमगढ़ को छोड़कर पूर्वांचल की बाकी सभी 25 सीटों पर भाजपानीत राजग का कब्जा हो गया। इस दफा भाजपा अपने उसी पुराने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में जी—जान से जुटी है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को करीब तीन लाख मतों से हराया था। इस बार भाजपा के सामने मोदी को पहले से भी ज्यादा अंतर से चुनाव जिताने की चुनौती है। प्रदेश भाजपा महामंत्री विजय बहादुर पाठक का कहना है कि मोदी इस बार वाराणसी से बड़ी जीत के अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ देंगे। मोदी के पुन: काशी से चुनाव लड़ने से भाजपा को पूर्वांचल की सभी 26 सीटों पर भी पार्टी का परचम लहराने के लिये जरूरी मनोबल हासिल होगा।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पिछले पांच साल के अपने शासनकाल में उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में जो विकास कार्य कराये हैं, उनसे जनता अच्छी तरह वाकिफ है और इस बार वह भाजपा को वोट देकर देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाएगी। पूर्वांचल का चुनावी रण कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी की प्रभारी प्रियंका गांधी की भी लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता की परीक्षा साबित होगा। इससे पहले सिर्फ रायबरेली और अमेठी में चुनाव प्रचार तक ही सीमित रहने वाली प्रियंका को पहली बार बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है। दरअसल, वह पूर्वांचल में पार्टी को जिताने की बेहद मुश्किल चुनौती के मुकाबिल खड़ी हैं।

प्रियंका पर प्रधानमंत्री मोदी की उम्मीदवारी वाले वाराणसी समेत समूचे पूर्वांचल में भाजपा के दबदबे को तोड़ने की जिम्मेदारी है। पिछले हफ्ते इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा यात्रा करके अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाली प्रियंका कभी कांग्रेस के दबदबे वाले पूर्वांचल में पार्टी का खोया हुआ जनाधार किस हद तक वापस ला पाती हैं, यह देखने वाली बात होगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार नाथ सिंह का दावा है कि प्रियंका का डंका निश्चित रूप से बजेगा। ऐसा इसलिये है कि वह सीधे कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों से संवाद कर रही हैं, जिसकी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

वह लोगों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास कर रही हैं कि कांग्रेस मोदी सरकार का सबसे अच्छा विकल्प है और देश का भविष्य उसी के हाथ में सुरक्षित है। वर्ष 2017 में पार्टी में पड़ी फूट के बाद सपा की कमान सम्भालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिये वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव उनके सियासी कौशल की पहली पूर्ण परीक्षा होगा। अखिलेश अपने पिता सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मौजूदा सीट आजमगढ़ से चुनाव लड़ेंगे। मुलायम को सपा ने इस बार मैनपुरी से उम्मीदवार बनाया है।  बसपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही सपा के अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा के वोट बैंक को बसपा के पक्ष में अंतरित कराने की होगी। गठबंधन के तहत सपा को ज्यादातर सीटें पूर्वांचल की ही मिली हैं, लिहाजा अखिलेश के लिये यहां का चुनावी संग्राम बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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