कुल के छींटे के साथ उर्स का समापन  

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  • गुलाब जल से धुली दरगाह

अजमेर। ख्वाजा गरीब नवाज के 807वें  में गुरुवार को कुल के छींटे के साथ छोटे कुल की रस्म निभाई। इस मौके पर दरगाह को गुलाब जल से धोया गया और गरीब नवाज की महाना छठी मनाई गई। ये रस्म पूरी कर एक रजब से जायरीन के लिए खोला गया जन्नती दरवाजा बंद कर दिया गया। खादिम समुदाय ने ख्वाजा साहब की मजार पर गुलाब के फूल पेश कर एक दूसरे की दस्तारबंदी की वहीं दरगाह दीवान ने मौरूसी अमला और जलाली फकीरों के सरदारों की दस्तारबंदी की। महाना छठी और कुल की रस्म में शामिल होने के लिए  देश और दुनिया के कौने-कौने से बेहिसाब जायरीन यहां पहुंचे।

बुधवार रात दरगाह के महफिल खाने में दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन की सिदारत में सूफियाना कव्वाली की आखिरी महफिल हुई, तभी जायरीन ने आस्ताने की दीवारों को गुलाब जल से धोना शुरू कर दिया था, लेकिन गुरुवार सुबह औपचारिक तौर पर धुलाई की रस्म अदा की गई। जायरीन महिलाएं बालों से दरगाह की जमीन की धुलाई करती दिखी वहीं अधिकांश जायरीन आस्ताने की दीवारों से रूमाल में गुलाब जल लेकर बोतलों में भरते देखे गए।

उनकी अकीदत यह है कि इस पानी को पीने से आसमानी हवा बेअसर और बीमारियां दूर होती है। सुबह करीब 11 बजे दरगाह के महफिल खाने में दीवान आबेदीन की सिदारत में रंग की महफिल हुई,जिसमें दरगाह के शाही कव्वाल असरार हुसैन ने अमीर खुसरो के इस कलाम 'मन कुन्ता मौला' से की। इसके बाद 'मोहे अपने रंग में रंग ले रंगीले' पढ़ा गया। अदब की महफिल में यह कलाम  'बरसता रंग है ख्वाजा मोई के आंगन में''भी पेश किया गया। दोपहर करीब पौने एक बजे 'आज रंग है मां रंग है' के साथ कुल की रस्म अदा की गई। दरगाह के नक्कारखाने से शादियाने बजाए गए और बड़े पीर की पहाड़ी से तोप दागकर उर्स का समापन किया गया। 

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