स्वरूपानंद सरस्वती का अयोध्या में राममंदिर शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित

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वाराणसी/प्रयागराज, रविवार, 17 फरवरी 2019। द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पुलवामा की घटना के बाद देश की बदली परिस्थितियों के मद्देनजर पूर्व से ही प्रस्तावित और परमधर्मसंसद् 1008 द्वारा उद्घोषित अयोध्या 'श्री रामजन्मभूमि रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास का कार्यक्रम' स्थगित कर दिया है. यह घोषणा ज्योतिष्पीठ और द्वारका शारदापीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने रविवार को काशी के श्रीविद्यामठ से यात्रा के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के माध्यम से जारी वक्तव्य के माध्यम से की.  ज्ञात हो कि पूज्य शंकराचार्य सोमवार से बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू से काशी के केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ चले आए थे और अपनी रामाग्रह यात्रा में सम्मिलित होने के लिए रविवार को प्रयाग रवाना होने वाले थे.

जारी बयान में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि शंकराचार्य रविवार को प्रयाग जाने के लिए सन्नद्ध थे. उनसे उनका स्वास्थ्य ठीक न होने का हवाला देकर यात्रा स्थगित करने या स्वरूप में बदलाव करने की प्रार्थना की जा रही थी पर वे तैयार न हो रहे थे. रविवार सवेरे जब उनके प्रमुख शिष्य और सहयोगियों ने स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज, ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी, डॉक्टर श्रीप्रकाश मिश्र आदि के साथ उन्हें टेलीविजन में पुलवामा घटना और उसके बाद देश की परिस्थितियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया. तब वे शांत हो गए और कुछ देर बाद वाराणसी के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने भी यही अनुरोध किया तो उन्होंने कहा कि हम देश के साथ हैं.

अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि ने पत्र लिखकर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने टेलीफोन कर इसी आशय का अनुरोध किया. पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा है कि यद्यपि श्रीरामजन्मभूमि के संदर्भ में हमने जो निर्णय लिया है वह सामयिक और आवश्यक भी है तथापि देश में उत्पन्न हुई इस आकस्मिक परिस्थिति के आलोक में हम यात्रा को कुछ समय स्थगित करने का निर्णय ले रहे हैं.

उन्होंने बताया कि रामाग्रह और शिलान्यास कार्यक्रम इसलिए भी आवश्यक है कि वर्तमान केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि अधिग्रहित भूमि में से विवादित भूमि उनके मूल मालिकों को वापस की जाए, जिसमें मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ हो सके. सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार की इस अर्जी को मूल वाद से जोड़ दिया है. इस कदम से उस भूमि के सदा सदा के लिए हिंदुओं के हाथ से निकल जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है जहां रामलला विराजमान हैं और जिनके लिए शताब्दियों से हिंदुओं ने संघर्ष किया है और न्यायालय से भी जिसे राम जन्मभूमि घोषित किया जा चुका है.

दूसरे श्रीराम को मनुष्य बुद्धि से देखकर उनका पुतला बनाने की जो योजना बनाई गई है वह भी और शास्त्रीय और सनातन धर्म और सनातन धर्मियों की भावना के विपरीत है. कश्मीर की आतंकवादी गतिविधियों से देश में युद्ध जैसा वातावरण बन गया है. आतंकवाद से पीड़ित हमारे सैनिकों के परिवार अत्यंत व्यथित हैं. भारत देश की रक्षा के लिए अपने प्राणोत्सर्ग करने वाले नौजवान सैनिकों को हम श्रद्धांजलि देते हैं और उनके परिजनों की भावनाओं के साथ शाम को संबोधित करते हैं.

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