सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अरविन्द केजरीवाल ने उठाए ये सवाल

img

नई दिल्ली, गुरूवार, 14 फरवरी 2019। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि लोकसभा के चुनाव में दिल्ली की जनता मोदी और शाह की जोड़ी को हराकर अपना अधिकार प्राप्त करना होगा। भाजपा उम्मीदवार के सामने सारे विपक्ष का एक उम्मीदवार खड़ा करें। यदि विपक्ष के दो उम्मीदवार खड़े होंगे तो उसका फायदा भाजपा को होगा। हमें देश की बहुत ङ्क्षचता है और चार साल में देश का माहौल बहुत खराब हुआ है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शक्तियों के बंटवारे पर गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सवाल उठा दिए हैं।उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट देने का आग्रह किया है। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को दिल्ली की जनता के खिलाफ बताया और कहा कि इसका एक ही इलाज है कि आप लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के लिए वोट न करके, सातों सीटें पर आम आदमी पार्टी को दें। केजरीवाल ने कहा कि अगर किसी ऐसे अधिकारी की नियुक्ति कर दी जाए, जो हमारी बात न सुने तो मोहल्ला क्लीनिक कैसे चलेगा? अगर कोई कहे कि इसने भ्रष्टाचार किया है तो मैं क्या करूं? क्या मैं भाजपा से बोलूं कि यह मामला देखो? यह सब भाजपा ही तो करवा रही है। यह फैसला संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।

केजरीवाल ने कहा कि इस बार आप प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मत देना। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। यहां के लोगों को अधिकार मिलना चाहिए। आप सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी को वोट दीजिए। हम संसद में लडक़र बाध्य करेंगे कि दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाया जाए। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए यदि आपको कोई समस्या होती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट चले जाना चाहिए। इस विवाद को लेकर कहा कि इससे जनता को नुकसान हो रहा है।

आपको बताते जाए कि आज केजरीवाल सरकार बनाम उपराज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना निर्णय सुना दिया है। इस मसले पर जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने सुनवाई की है। सबसे पहले जस्टिस एके सीकरी ने अपना निर्णय पढ़ते हुए बताया कि राजधानी में सभी एक्जीक्यूटिव अधिकार दिल्ली सरकार के पास ही रहेंगे। 

जस्टिस अशोक भूषण ने भी कुछ मुद्दों पर जस्टिस सीकरी के साथ सहमति जताई, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर दोनों जजों में मतभेद ही रहा, इसलिए इस मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेजने का निर्णय किया है।  हालांकि, दिल्ली में जमीन, पुलिस और कानून व्यवस्था से जुड़े सारे अधिकार केंद्र सरकार यानी उपराज्यपाल के पास ही रहने की बात कही है। ये अभी अंतिम निर्णय नहीं है क्योंकि दो जजों की बेंच में मतभेद दिखाई दिया है। जस्टिस सीकरी ने अपने निर्णय में कहा कि किसी अफसर की नियुक्ति या फिर ट्रांसफर को लेकर उपराज्यपाल राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की सलाह पर फैसला ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि आईपीएस की ट्रांसफर-पोस्टिंग का हक उपराज्यपाल, और DANICS-DANIPS का निर्णय मुख्यमंत्री के पास रहेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि DASS और DANICS के अधिकारियों के विषय पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement