वन भूमि को करें विलायती बबूल मुक्त- वन मंत्री सुखराम विश्नोई

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  • लगाए जाएंगे फलदार वृक्ष

अजमेर, (कासं)। वन, पर्यावरण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामलात मंत्री सुखराम विश्नोई ने रविवार को विभागीय अधिकारियों की बैठक में कहा कि जिले की समस्त वन भूमि से विलायती बबूल को हटाया जाकर उसके स्थान पर फलदार पौधे लगाए जाएं। विश्नोई ने कहा कि जिले की वन भूमि, 17 बिहड़ों एवं पहाड़ी क्षेत्रों से विलायती बबूल को समूल हटाया जाएगा। इन्हे हटाने के लिए स्थानीय स्तर पर टेण्डर लगाए जाएंगे। निविदादाता के द्वारा आगामी  3 वर्ष तक भी भूमि से विलायती बबूल हटाया जाएगा। इसके साथ ही इस जगह पर फलदार पौधे लगाए जाएंगें। इन पौधों से पशु एवं पक्षियों को भोजन एवं आश्रय मिलेगा। स्थानीय प्रजाति के कम पानी में उगने वाले फलदार पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें बिल्व पत्र, लसोड़ा, खेजड़ी, झाल, कुमटा, गुंदी, इमली, जामून, बांस, बैर, नीम एवं एलोवेरा जैसे पौधों का रोपण किया जाएगा।  इन पौधों की कम से कम 80 फीसदी संख्या 3 वर्ष पश्चात जीवित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा फलदार पौधों की नर्सरी तैयार की जाएगी। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों की पौध भी तैयार होगी। इस संबंध में आम जन को भी जागरूक किया जाएगा। इन पौधों को घरों तथा परिवेश में लगाने के लिए प्रोत्साहित करके गमले में पौध का विक्रय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर वन उद्यान में भी फलदार पौधे लगाए जाएं । इससे पक्षियों की कई प्रजातियां वहां अपना आवास बनाएगी। पक्षियों के कलरव के मध्य शहरी परिवार सुकुन के दो पल बिता सकेंगे। नगर निगम के अधिकारियों को  ठोस कचरे का निस्पादन ऊर्जा उत्पादन के लिए करने के निर्देश दिए। अन्य शहरों में पूर्व में संचालित संंयंत्रों का अवलोकन करने के लिए भी कहा। सिविरेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठोस अपशिष्ठ का उपयोग जैविक खाद बनाने के लिए किया जाए और इससे नगर निगम अपनी आय का अतिरिक्त स्त्रोत विकसित कर सकती है। प्लांट से निकलने वाले उपचारित जल का सशुल्क उपयोग किसानों द्वारा सिंचाई करने में किया जाए।

उन्होंने कहा कि जंगल में वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए समस्त वन क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर जल स्त्रौत विकसित किए जाएंगे। इससे वन्य प्राणियों को पानी एवं भोजन सुलभ होगा। इस प्रयास सें उनका बस्तियों में आना कम हो पाएगा। अन्य जिलों से भ्रमण करने वाले वन्य प्राणियों को स्थाई आवास मिलना सुनिश्चित होने से वे यहां ठहराव कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि खरमौर जैसे संरक्षित प्राणियों को प्राकृतिक आवास एवं सुरक्षा उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगें। संरक्षित प्राणियों के बचाव के संबंध में स्थानीय निवासियों को जागरूक किया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में इनके द्वारा उपयोग लिये जाने वाले पौधों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किया जाएगा। बॉम्बे नेशनल हिस्ट्री सोसाईटी के वैज्ञानिकों के द्वारा भी खरमौर संरक्षण की दिशा में रूचि दिखाई गई है।

उन्होंने कहा कि जिले में रसद विभाग की व्यवस्थांए माकूल एवं चाक चौबंद है। राशन डीलर द्वारा क्रय-विक्रय सहकारी समिति को समय पर गेहूं की राशि जमा कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही पीओएस मशीन को भी अपडेट करके स्टॉक की सही एंट्री की जाए। विद्यालयों के लिए आवंटित समस्त अनाज का सदुपयोग हो एवं नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। इस संबंध में विभिन्न विद्यालयों में आकस्मिक निरीक्षण करके कट्टो का वजन तौला जाए। राशन संबंधी शिकायत आने पर उसका संवेदनशीलता के साथ निस्तारण हो।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अनुज्ञा पत्रों की शर्तों के अनुसार कार्य संपादित हो। जिले में पानी का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाईयों को जल प्रदूषण नहीं करने के लिए पाबंद किया जाएगा। ब्यावर की समस्त ऊन धुलाई इकाईयों में पानी का पुनर्चक्रण सुनिश्चित होने के साथ ही काम में लिए गए जल का सौलर जैसी प्रमाणिक तकनीक से वाष्पिकरण सुनिश्चित होना चाहिए। इस बारे में बोर्ड के अधिकारियों के द्वारा रिपोर्ट 7 दिवस में तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिले में समस्त चिकित्सालयों के जैव अपशिष्टों का निर्धारित तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए। चिकित्सा विभाग द्वारा समस्त चिकित्सालयों की जांच करके ये सुनिश्चित किया  जाएगा कि जैव अपशिष्टों का नियमित उठाव हो तथा संक्रमित एवं असंक्रमित कचरे का पूर्ण निस्तारण हो। इस अवसर पर जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर एम.एल नेहरा, जिला रसद अधिकारी संजय माथुर, आरसीएचओ डॉ. रामलाल चौधरी सहित वन विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बॉर्ड के अधिकारी उपस्थित थे।

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