वंदे मातरम की रोक का फैसला विरोध के बाद बदला

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भोपाल, गुरूवार, 03 जनवरी 2019। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने वंदे मातरम की अनिवार्यता पर अस्थायी रूप से रोक लगाने के विरोध के बाद अब अपने फैसले को बदल कर उसमें नयापन ला दिया है। कमलनाथ सरकार ने वंदे मातरम का गायन और आकर्षक बनाने का निर्णय किया है। इसके अनुसार अब अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आम जनता भी वंदे मातरम के गायन में शामिल हो सकते हैं। अब राष्ट्रगान पुलिस बैंड की धुन पर राष्ट्रगीत गाया जाएगा। आपको बताते जाए कि इससे पहलेनौकरशाहों ने अघोषित तौर पर सामूहिक वंदे मातरम पर रोक लगाकर सरकार की छीछालेदर करा दी है। राज्य में सत्ता बदली है। इसके साथ ही बदलाव की बयार जारी है। नौकरशाही की सर्जरी का क्रम जारी है। 

मुख्य सचिव की जिम्मेदारी एस. आर. मोहंती को मिल चुकी है। कांग्रेस सरकार की किसान कर्जमाफी सहित अन्य फैसलों पर अमल हो पाता कि उससे पहले विवादों की शुरुआत हो गई है। पहला विवाद वंदेमातरम गान को लेकर है। ज्ञात हो कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के कार्यकाल में हर महीने की पहली तारीख को सामूहिक वंदे मातरम् गायन की शुरुआत की गई थी। 

यह सिलसिला बीते 13 सालों से अनवरत चला आ रहा था, मगर सत्ता बदलने के बाद की पहली तारीख अर्थात एक जनवरी को ही वल्लभ भवन परिसर में वंदे मातरम् नहीं हुआ। इससे सरकार विवादों में घिर गई है। भाजपा ने इस मामले को हाथों-हाथ लपक लिया है। क्योंकि सामूहिक वंदे मातरम् गान का आयोजन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किया जाता है। वर्तमान में यह विभाग मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास है, लिहाजा भाजपा ने सीधे तौर पर कमलनाथ पर हमले तेज कर दिए हैं।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक जनवरी से वंदे मातरम् गायन बंद करके प्रदेश के राष्ट्रभक्त नागरिकों को नए साल का तोहफा दिया है। लेकिन ऐसा करके कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ ने आने वाले लोकसभा चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया है। कमलनाथ सरकार के इस कदम से साफ हो गया है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते कांग्रेस और कमलनाथ भारत के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगाने वाले गैंग को राजनीतिक संरक्षण प्रदान करेंगे।

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