मंदिर आंदोलन में नहीं थी शिवसेना की भूमिका- केशव मौर्य

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अयोध्या, रविवार, 25 नवंबर 2018। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज कहा कि मंदिर आंदोलन में शिवसेना की कोई भूमिका नहीं थी। मौर्य ने टेलीफोन पर कहा कि अगर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे राम लला के दर्शन करने जा रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिहाज से वह जो कुछ भी कर रहे हैं, अगर बाला साहेब ठाकरे जिन्दा होते, तो वह उद्धव को ऐसा करने से अवश्य रोकते।

उन्होंने कहा कि मंदिर आंदोलन में शिवसेना की पूर्व में भी कोई भूमिका नहीं थी और वर्तमान में :धर्म सभा में: भी नहीं है। हालांकि विश्व हिन्दू परिषद को बाला साहेब ठाकरे का हमेशा समर्थन प्राप्त रहा। मौर्य ने कहा कि भगवान राम के भक्तों को बलिदान के बारे में जानकारी है। उन्हें यह भी पता है कि वर्तमान में कौन बलिदान कर सकता है और पूर्व में किसने बलिदान किया था। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि धर्म सभा के लिए सेना तैनात की जानी चाहिए। मौर्य ने कहा कि अखिलेश का बयान उनकी हताशा को दर्शाता है।

इस सवाल पर कि मुसलमान धर्म सभा को लेकर सशंकित हैं, मौर्य ने कहा कि किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उत्तर प्रदेश में शांति है। सरकार ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किये हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना होने पाये। उन्होंने कहा कि भाजपा अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की समर्थक है। भाजपा के लिए यह चुनावी मुद्दा कभी नहीं रहा बल्कि यह आस्था का विषय है। मौर्य ने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि पर कोई मकबरा या मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी।

राम मंदिर कब तक बनेगा, इस प्रश्न पर मौर्य ने कहा कि जब तक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है, ना तो भाजपा और ना ही मंदिर आंदोलन से जुड़ा कोई संगठन तारीख बता सकता है। तारीख बताना भाजपा या सरकार का काम नहीं है। यह विहिप, श्रीराम जन्मभूमि न्यास और साधु संतों का काम है। भाजपा इस आंदोलन को नैतिक समर्थन देगी।

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