RBI के पक्ष में उतरे रघुराम राजन, बैंक की स्वतंत्रता से मिलेगा फायदा

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नई दिल्ली, मंगलवार, 06 नवंबर 2018। केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच खींचतान होने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत सरकार को कदम पीछे खींचने की सलाह दे दी है। इसके साथ ही पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी सलाह देते हुए कहा कि एक स्वतंत्र और स्वायत्त केन्द्रीय बैंक से राष्ट्र को फायदा ही मिलता है। एक बिजनेस टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में रघुराम राजन ने कहा कि भारत सरकार और केन्द्रीय रिजर्व बैंक के बीच मचे संग्राम में जब ही लगाम लग सकती है जब दोनों एक-दूसरे की मंशा और स्वायत्तता का सम्मान कर सकेंगे। 

राजन ने आगे बताया कि जहां तक संभव है रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को बरकरार रखना देश के लिए है और ऐसा करना देश की परंपरा रही है। उल्लेख है कि मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल ने सितंबर 2016 में रघुराम राजन से केन्द्रीय बैंक की कमान अपने हाथ में ली थी। दोनों के रिश्तों में खटास की प्रमुख कारण वित्तीय फैसलों में रिजर्व बैंक की अधिक भूमिका को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने की योजना है।

आपको बताते जाए कि केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच मुख्य कारण यह है कि केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपए की रकम है। केन्द्र सरकार का दावा है कि इतनी बड़ी रकम रिजर्व बैंक के रिजर्व खाते में रहने का कोई फायदा नहीं है। सरकार चाहती है कि इस खजाने से एक-तिहाई पैसा निकालकर देश में सरकारी बैंकों में नई ऊर्जा का संचार करते हुए देश में कारोबारी तेजी लाया जा सकें। इस सलाह को केन्द्रीय बैंक सरकार के इस प्रस्ताव को अपनी स्वायत्तता पर हमला मान रही है।

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