अयोध्या में राममंदिर निर्माण मुद्दे पर दिल्ली में जुटे बड़े संत

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अयोध्या/नई दिल्ली, शुक्रवार, 05 अक्टूबर 2018। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर संतों ने कहा- केंद्र में मोदी और राज्य में योगी सरकार के रहते हुए अब इंतजार नहीं हो रहा। राममंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को वीएचपी से जुड़े देशभर से 36 बड़े संत शुक्रवार को दिल्ली में एकजुट हुए हैं। संत यहां बैठक कर मंदिर निर्माण की दिशा तय करने के लिए आगे की रणनीति बना रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अगुवाई में संत दिल्ली आए हैं। वहीं मंदिर निर्माण को लेकर अयोध्या में तपस्वी छावनी मंदिर के महंत राम परमहंस दास सोमवार से आमरण अनशन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड भी इस मामले पर रणनीति बनाने के लिए दिल्ली में बैठक कर रहा है। 

इधर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे मुकदमे की सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से नियमित सुनवाई शुरू होगी, लेकिन उससे पहले राममंदिर के निर्माण को लेकर संत दिल्ली में जुट गए हैं। दिल्ली में संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास, न्यास सदस्य पूर्व सांसद रामविलासदास वेदांती, महंत सुरेश दास, संत समिति अध्यक्ष महंत कन्हैया दास शामिल हैं। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि मोदी के सत्ता में आने से हिंदू समाज को राममंदिर निर्माण की उम्मीद जागी थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है।

उन्होंने बताया कि देश के प्रमुख साधु-संत बैठक कर अब अपनी भावनाओं से अवगत ही नहीं कराएंगे बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए आगे ठोस कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी और राज्य में योगी सरकार के रहते हुए अब इंतजार नहीं करना संतों को अखर रहा है। ऐसे में मोदी सरकार को राम मंदिर निर्माण का समाधान का हल जल्द से जल्द निकालना चाहिए।

राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद पिछले काफी समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि अयोध्या में राम का भव्य मंदिर बनना चाहिए और जल्दी बनना चाहिए। वीएचपी और संतों की तरफ से बार बार इस बात को लेकर बयान भी आते रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी पिछले दिनों कई बार राम मंदिर को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद बाद से यह मुद्दा और गरमा गया है। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज भी कह चुके हैं कि 2019 से पहले भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने कोर्ट से भी अपील की था कि जल्दी से जल्दी इस मामले का निपटारा किया जाए।

वीएचपी के कार्याध्यक्ष अलोक कुमार ने बताया कि कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि राम मंदिर का निर्माण होगा। राम मंदिर बनेगा। अब इसका रास्ता क्या होगा, इस पर पांच अक्टूबर को संतों की उच्चाधिकार समिति विचार करेगी। उन्होंने कहा कि अदालत इस मामले में सुनवाई करके फैसला सुनाएगी, कानून के माध्यम से इस पर आगे बढ़ा जा सकता है। इन मुद्दों पर संतों की समिति विचार करेगी। हालांकि कुमार ने कहा कि इस बैठक में संतों के समक्ष सभी विषयों पर चर्चा की होगी। हम संतों से आगे का मार्ग पूछेंगे और जैसा वे बतायेंगे, वैसा करने के लिये हम प्रतिबद्ध हैं । विहिप कार्याध्यक्ष ने कहा कि संसद में कानून बनाकर भी आगे बढ़ा जा सकता है और इस बारे में सरकार को तय करना है। उन्होंने कहा कि 'कानूनी बाधाएं दूर करके राम मंदिर के निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो, ऐसा संतों से मार्गदर्शन लेकर काम करेंगे। यह बैठक श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होगी।

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