‘मॉब लिचिंग’ पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

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  • 8 राज्यों से मांगा जवाब

नई दिल्ली, सोमवार, 24 सितंबर 2018। देश भर में मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा किसी की पीट-पीटकर हत्या कर देने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटनाओं को लेकर कड़ा रूख अपनाया हुआ है।कोर्ट ने ‘मॉब लिचिंग’ रोकने के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर अमल न किये जाने को लेकर सोमवार को एक बार फिर गहरी नाराजगी जताते हुए आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा। 

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि इन राज्यों ने अभी तक यह नहीं बताया कि गौरक्षा के नाम पर हो रहे उपद्रव और मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाये हैं। न्यायालय ने इन सभी राज्यों से दो हफ्ते की भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इन आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिमाचल प्रदेश, दमन और दीव, दादर तथा नगर हवेली, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, तेलंगाना, दिल्ली, नागालैंड और मिजोरम शामिल हैं। 

खंडपीठ ने केंद्र सरकार से भी पूछा कि मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए उसने जन जागरुकता सुनिश्चित करने की दिशा में क्यों कोई कदम नहीं उठाया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने न्यायालय को बताया कि जो लोग मॉब लिंचिंग के आरोपी हैं और जिनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किये गये हैं, वे लोग चुनाव लडऩे के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर रहे हैं। 

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