PMO को भेजी थी हाई प्रोफाइल फ्रॉड करने वालों की लिस्ट- राजन

img

नई दिल्ली, बुधवार, 12 सितंबर 2018। भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े बहुचर्चित मामलों की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय को  समन्वित कार्रवाई के लिए सौंपी गई थी, लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। राजन ने संसद की एक समिति को लिखे पत्र में यह बात कही है। आकलन समिति के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी को भेजे पत्र में राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली में धोखाधडिय़ों का आकार बढ़ रहा है। हालांकि, यह कुल गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की तुलना में अभी काफी छोटा है।

राजन ने कहा, ‘‘जब मैं गवर्नर था तो रिजर्व बैंक ने धोखाधड़ी निगरानी प्रकोष्ठ बनाया था, जिससे धोखाधड़ी के मामलों की जांच एजेंसियों को रिपोर्ट करने के कार्य में समन्वय किया जा सके। मैंने पीएमओ को बहुचर्चित मामलों की सूची सौंपी थी। मैंने कहा था कि हम कम से कम एक या दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। मुझे नहीं पता कि इस मामले में क्या प्रगति हुई। इस मामले को हमें तत्परता के साथ सुलझाना चाहिए।’’

राजन सितंबर, 2016 तक 3 साल के लिए केंद्रीय बैंक के गवर्नर रहे थे। अभी वह शिकागो बूथ स्कूल आफ बिजनेस में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रणाली अकेले किसी एक बड़े धोखाधड़ी मामले को अंजाम तक पहुंचाने में प्रभावी नहीं है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी सामान्य गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से भिन्न होती है। उन्होंने कहा, ‘‘जांच एजेंसियां इस बात के लिए बैंकों को दोष देती हैं कि वे धोखाधड़ी होने के काफी समय बाद उसे धोखाधड़ी का दर्जा देते हैं। वहीं, बैंकर्स इस मामले में धीमी रफ्तार से इसलिए चलते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि एक बार वे किसी लेन-देन को धोखाधड़ी करार देते हैं तो धोखेबाजों को पकडऩे की दिशा में कोई खास प्रगति हो न हो, उन्हें जांच एजेंसियां परेशान करेंगी।’’ 

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement