अफस्पा मामले में याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई कल

img

नई दिल्‍ली, रविवार, 19 अगस्त 2018। अफस्पा मामले में अपने हितों को सुरक्षित करने की गुहार लेकर सेना के 356 जवानों और अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता पीठ इस मामले को सुनेगी. दरअसल, सेना के 356 जवानों और अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायरकर मांग की है कि देश की सुरक्षा के लिए आर्म्‍ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) के तहत कर्तव्य निर्वहन में किए कार्य के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर उनका उत्पीड़न न किया जाए. ऐसे में उनके हित सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट दिशा निर्देश जारी करे. याचिका में यह भी मांग है कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वह सैनिकों के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित अभियोजनों और एफआईआर को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए.

याचिका में ये भी मांग उठाई गई है कि केंद्र सरकार की पूर्व इजाजत के बगैर अफस्पा में प्राप्त शक्तियों के तहत की गई कार्रवाई के लिए कोई एफआईआर या अभियोजन न हो. उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ जांच हो जो कर्तव्य निर्वहन में लगे सैनिकों को दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दाखिल कर निशाना बना रहें हैं. अनावश्यक एफआईआर दर्ज कर परेशान किए गए सैन्य अधिकारियों को उचित मुआवजा दिलाया जाए.

याचिका में कहा गया है कि अफस्पा के तहत सेना के जवान देश में उग्रवाद और छद्म युद्धों को रोकने के लिए लड़ाई लड़ते हैं. ऐसे में अफस्पा प्रोटेक्शन के अंतर्गत सशस्त्र बलों को मिले अधिकारों में कमी किया जाना देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है. अफस्पा कानून में संशोधन के बिना सैन्य अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. सैन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी होगी. 

आपको बता दें कि यह याचिका सीमा पर कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करने वाले जवानों का आत्मविश्वास और मनोबल बनाए रखने के लिए भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों की ओर से सामूहिक तौर पर दाखिल की गई है. याचिका में यह भी कहा गया है कि जवान अपने कर्तव्य निर्वहन और देश की संप्रभुता व सुरक्षा कायम रखने के लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं.

वे इसके लिए अपना जीवन न्‍यौछावर करने में भी नहीं हिचकते, लेकिन उनके सहयोगियों के खिलाफ कर्तव्य निर्वाहन मे किये गये इन कार्यो के लिए आपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई हो रही है जिससे उन्हें याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा. संविधान में भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा को सर्वोपरि माना गया है. ऐसे में अगर सेना को संरक्षण नहीं दिया गया तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा होगा.

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement