हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में मानसिक बीमारियां होंगी शामिल

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  • परिपत्र जारी

जयपुर, शनिवार, 18 अगस्त 2018। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आई.आर.डी.ए.आई) ने 16 अगस्त 2018 को सभी बीमाकर्ता को स्वास्थ्य बीमा नीतियाँ में मानसिक बीमारीयों को कवर करने के लिए निर्देश जारी किया है जो कि पूरे देश में तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। निर्देश के अनुसार 29 मई 2018 से देशभर में लागू हुए ‘मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम-2017’ की धारा 21(4) का हवाला देते हुए लिखा है कि प्रत्येक बीमाकर्ता मानसिक रुग्णता के उपचार के लिए शारीरिक रुग्णता के उपचार के लिए उपलब्ध समान चिकित्सा बीमा का उपबंध करेगा । राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थान आरोग्यसिद्धि फाउंडेशन के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ भूपेश दीक्षित ने बताया कि आई.आर.डी.ए.आई का यह कदम स्वागतयोग्य और अति-महत्वपूर्ण है। 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 के अनुसार भारत में 2 से 3 प्रतिशत लोग गंभीर मानसिक रोग से ग्रसित है जिसके अनुसार राजस्थान में भी अनुमानतः लगभग 13 लाख लोग गंभीर मानसिक रोग से ग्रसित है । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइडस इन इंडिया 2015’ की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 01 लाख लोगों पर करीब 05 लोग आत्महत्या करते है । राजस्थान में वर्ष 2007 से 2017 के बीच यानि के पिछले दस वर्षों में 48000 से ज्यादा व्यक्तियों ने आत्महत्या की है। 

रिपोर्ट के अनुसार 93 प्रतिशत खुदखुशी मानसिक कारणों से हो रही है । एक अनुमान के मुताबिक मानसिक बीमारीयों के निदान व उपचार के लिए मानसिक रुग्णता से ग्रसित व्यक्ति अपनी जेब से 1500 से 2000 रुपए प्रतिमाह वहन कर रहे है जिसके कारण मानसिक रुग्णता से ग्रसित व्यक्ति आर्थिक बोझ के तले गरीबी एवम अभावों में जीवनयापन करने को मजबूर हो रहे है। 

दीक्षित ने बताया कि देश में ज्यादातर बीमा कंपनियां अभी तक मानसिक बीमारियाँ जैसे कि डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, स्किझोफ्रेनिया आदि मानसिक बीमारियाँ को अपनी स्वास्थ्य बीमा नीतियाँ में सम्मिलित नहीं कर रही थी जिससे कि रोगियों को मानसिक बीमारीयों के उपचार की सुविधा लेने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था जबकि स्वास्थ्य बीमा नीतियाँ में शारीरिक रुग्णता के उपचार के लिए बीमाकर्ता द्वारा बीमा कवर दिया जाता है।

अभी तक मानसिक रोगियों को स्वास्थ्य बीमा में मानसिक स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए भेदभाव का शिकार होना पड़ता था किन्तु अब ऐसा नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति शारीरिक बीमारीयों के अलावा मानसिक बीमारीयों के लिए भी बीमा कंपनियों से स्वास्थ्य बीमा पालिसी करवा सकेगा और कवरेज का लाभ ले सकेगा। 

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