शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को सुझाव दें शिक्षक और बुद्धिजीवी- नरेन्द्र मोदी

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मुम्बई, रविवार, 12 अगस्त 2018। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईआईटी जैसे संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर आज जोर दिया और इस संबंध में शिक्षकों और बुद्धिजीवियों से सुझाव आमंत्रित किये। मोदी ने नवोन्मेष की जरूरत पर बल दिया और कहा कि नवोन्मेष नहीं अपनाने वाले समाज ठहर जाते हैं। उन्होंने आईआईटी बम्बई के 56वें वार्षिक दीक्षांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के लिए 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की और कहा कि छह दशक के ‘‘लगातार प्रयास’’ ने इसे एक प्रतिष्ठित संस्थान बनाया है।

उन्होंने कहा कि सात लाख इंजीनियर देश के शैक्षिक परिसरों से पास होते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए एक सामूहिक प्रयास की जरूरत है कि वे उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और जरूरी कौशल हासिल करें। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां मौजूद शिक्षकों और बुद्धिजीवियों से अपील करता हूं कि उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए कि गुणवत्ता में कैसे सुधार लाया जा सकता है और उन्हें सुझाव के साथ आना चाहिए। यह सुनिश्वित करना हमारी जिम्मेदारी है कि न केवल मात्रा बल्कि गुणवत्ता भी उच्च स्तर की हो। सरकार भी इसके लिए प्रभावी कदम उठा रही है।’’ 

उन्होंने आईआईटी बंबई की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘पिछले छह दशक के लगातार प्रयासों के चलते हुआ है कि आईआईटी..बी ने देश के प्रमुख संस्थानों में एक स्थान बनाया है। आपको 1000 करोड़ रूपये का वित्तीय सहायता मिलेगी जो आधारभूत ढांचे के विकास में सहायता करेगा।’’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि संस्थान से स्नातक की शिक्षा हासिल करने वाले कई छात्र देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। मोदी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सात आईआईटी, सात आईआईएम, दो आईआईएसईआर और 11 आईआईआईटी को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए आरआईएसई(शिक्षा में बुनियादी ढांचे और प्रणालियों का पुनरुद्धार) कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत एक लाख करोड़ रूपये जमा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नये संस्थान, नये आधारभूत ढांचे की जरूरत है, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इससे दश शक्ति उत्पन्न हो।’’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकसित अर्थव्यवस्था की आधारशिला नवोन्मेष और उद्योगों के जरिये रखी जा रही है जिससे प्रौद्योगिकी आधारित टिकाऊ दीर्घकालिक वित्तीय विकास होगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए नवोन्मेष और उद्यम आधार होंगे। केंद्र की ओर से शुरू किये गए स्टार्ट अप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन का परिणाम यह हुआ है कि भारत प्रौद्योगिकी के लिए विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है।’’ उन्होंने कहा कि आगामी दो दशकों में नवोन्मेष और नव प्रौद्योगिकी विश्व में विकास के पथ का निर्णय करेगा और इसमें आईआईटी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी।

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