AMU आरक्षण विवाद: कठेरिया ने की अफसरों से मुलाकात

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SC में दिया गया हलफनामा

नई दिल्ली, मंगलवार, 03 जुलाई 2018। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) एक बार फिर चर्चा में हैं. सांसद सतीश कुमार गौतम ने एक बार फिर एएमयू के वीसी को पत्र लिखकर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर शुरू हुए महासंग्राम के बीच केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है.

आपको बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर राम शंकर कठेरिया ने आरक्षण का मुद्दा उठाया था. इसी सिलसिले में बात करने के लिए वो अलीगढ़ पहुंचें. आपको बता दें, रामशंकर कठेरिया ने हाल ही में कहा था कि जेएनयू और जामिया विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं, बावजूद इसके इन दोनों में छात्रों को आरक्षण का लाभ न दिए जाने से छात्रों में आक्रोश है. उन्होंने कहा था कि पूरे मामले पर सरकार और आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है.

अलीगढ़ में हुआ मंथन
जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ में राम शंकर कठेरिया ने जिले के अफसरों के साथ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में एससी एसटी व पिछड़ों को दाखिले में आरक्षण को लेकर मंथन हुआ. इस बैठक में  एएमयू के सह कुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब भी शामिल हैं.

आयोग की इस बैठक को लेकर एएमयू का माहौल एक बार फिर गर्माया. बैठक में एएमयू के सह कुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने कहा कि विश्वविद्घालय किसी भी तरह का कोई कोटा नहीं देता है. उन्होंने इस बैठक में कहा कि छात्रों को उनकी रैकिंग के हिसाब से एडमिशन दिया जाता है. एएमयू के सह कुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने बताया कि साल 2005 में एएमयू ने एक अपील दायर की थी कि अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण होना चाहिए, जिसका मामला अभी भी विचारधीन चल रहा है.

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