दाती के पाली आश्रम में छापा

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नई दिल्ली, शनिवार, 16 जून 2018। दाती मदन उर्फ महाराज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया और गृह मंत्रालय के दबाव के बाद अब पुलिस दाती मदन की जांच के दौरान ही उसकी गिरफ्तारी करेगी। हालांकि इससे पहले पुलिस ने कहा था कि मामला पुराना है नतीजतन पहले सबूत जुटाए जाएंगे, लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि बाबा को गिरफ्तार किया जाएगा।

इसी सिलसिले में क्राइम ब्रांच ने वीरवार को छतरपुर आश्रम की जांच के बाद राजस्थान के पाली और नेपाल के एक आश्रम में दबिश दी। इस संबंध में क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट सीपी आलोक कुमार ने बताया कि दाती मदन व उसके दोनों शिष्यों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया गया है जो एक साथ आरोपियों की तलाश में दबिशें दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि पीड़िता के वीरवार को एक बार फिर से बयान लिए गए जिसमें बताया गया कि आश्रम में उनके साथ कब-कब और कहां-कहां दुष्कर्म, कुकर्म व अप्राकृतिक यौनाचार किया गया। पुलिस को युवती द्वारा दी गई जानकारियां सही मिलीं। साथ ही पुलिस को आश्रम से कई सबूत भी मिले हैं।

दाती मदन की मुश्किलें इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि पीड़िता ने छतरपुर के उस मंदिर सहित उन जगहों को बताया जहां उसके साथ रेप किया गया और वे जगह सही पाई गईं। उसने ये भी बताया कि कब-कब वह कहां थी और कब-कब दाती मदन के शिष्यों ने उसके साथ रेप किया। इन सभी की जांच की गई और उसमें पीड़िता की लोकेशन भी सही पाई गई। पीड़िता के मुताबिक, राजस्थान स्थित आश्रम 5 बार दाती मदन समेत उसके साथियों ने दुष्कर्म, कुकर्म तथा अप्राकृतिक यौनाचार किया और धमकाया।

सुबह तड़के ही क्राइम ब्रांच की टीम ने पाली में सोजत रोड स्थित आश्रम पर दबिश दी। लेकिन, इस दबिश के दौरान वहां जो मिला उसे देख पुलिस दंग रह गई। मौके पर बने 27 कमरे खाली थे और सभी हॉल से सामान गायब था। मौके पर केवल गार्ड के अलावा 5 लोग केयरटेकर के रूप में मौजूद थे जिनसे पूछताछ की गई।

मौके पर पता चला कि वीरवार दोपहर तक बाबा के आश्रम में होने की जानकारी थी, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं देखा। यही नहीं, बीते वीरवार को सुबह तक आश्रम में 800 से ज्यादा शिष्याएं मौजूद थीं, लेकिन एकाएक सभी गायब हो गईं, ये सभी कहां गई हैं इसकी जांच के लिए राजस्थान पुलिस से सहयोग मांगा गया है। हालांकि पुलिस ने मौके से कई दस्तावेजों को जब्त किया है जिसमें कई ऐसी जानकारियां मिली हैं जिसके तहत दीक्षा लेने वाली शिष्या से शपथ पत्र लिखवाए जाते थे।

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