जनादेश का अपमान करके लोकतंत्र का सम्मान नहीं हो सकता- रविशंकर प्रसाद

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नई दिल्ली, सोमवार, 21 मई 2018। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज कहा कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है। जनादेश का अपमान करके लोकतंत्र का सम्मान नहीं हो सकता। केंद्रीय मंत्री प्रसाद ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा से जुड़े सवाल पर कहा कि किसका बहुमत है यह विधानसभा में फ्लोर पर तय होता है। देश को वही चलाएगा जिसे जनता का आशीर्वाद मिला है। उनके मुख्‍यमंत्री दो जगह से लड़ते हैं एक जगह 36 हजार वोट से हारते है और एक जगह साढ़े सोलह हजार से जीतते हैं,उनके 16 मंत्री हार जाते हैं फिर भी दम की सरकार हम ही बनाएंगे“

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि '1989 में बोफोर्स केस के भ्रष्‍टाचार के बाद हुए चुनाव में राजीव गांधी की कांग्रेस को 191 सीट मिली थी, जबकि 1984  में 400 सीट मिलीं थी, और तब उन्‍होंने कहा था कि बहुमत हमारे पक्ष में नहीं है, हम भले बड़ी पार्टी हो, हमारी पार्टी विपक्ष में बैठेगी,  ये होता है लोकलाज।' वहीं विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप पर उन्होंने कहा, 'हमपर आया राम गया राम पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के एक बड़े नेता के रिजार्ट में विधायकों को लॉक करके रखा गया था। आपको अपने विधायकों पर विश्वास नहीं है। जनादेश का यही अपमान है।'

राहुल गांधी द्वारा भारत की तुलना पाकिस्तान से करने के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने  कहा कि चुनाव में हम हारेंगे या जीतेंगे लेकिन देश की इज्जत के लिए हमें एकजुट रहना होगा। राहुल गांधी ने भारत की तुलना पाकिस्तान से करके पाकिस्तान को मजबूत किया है। मुझे उम्मीद है , कांग्रेस पार्टी के लोग अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को समझाएं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जिस कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाया था उसी मुख्य न्यायाधीश ने  आधी रात को न्याय के लिए अपना दरवाजा खोल दिया।

उन्होंने कहा, जजों को सुपरसीड करने का काम किसने किया? जस्टिस एचआर खन्ना ने इमरजेंसी के दौरान कहा कि इंसान की आजादी पर समझौता नहीं हो सकता.. राहुल गांधी जी की दादी ने उन्हें दो महीने के लिए भी चीफ जस्टिस नहीं बनने दिया। राहुल गांधी होमवर्क नहीं करते हैं, उनको समझाइये कि वे अपना होमवर्क सही तरीके से करें।

न्यायपालिका और जजों की नियुक्ति के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ही लिखा है कि  सरकार को कॉलेजियम के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अधिकार है। हम उस अधिकार का उपयोग कर रहे हैं तो उसपर भी लोगों को आपत्ति है जो कि नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए। न्यायपालिका की स्वायत्ता का सम्मान होना चाहिए। जस्टिस जोसेफ से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे जुड़े फैसले का उत्तराखंड के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।

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