जल संरक्षण सामाजिक जिम्मेदारी- मोदी

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नई दिल्ली, रविवार, 29 अप्रैल 2018। जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जल-संरक्षण और जल-प्रबंधन की दिशा में अहम प्रयास किये गए हैं और हर साल मनरेगा बजट से हटकर जल-संरक्षण और जल-प्रबंधन पर औसतन 32 हज़ार करोड़ रूपए खर्च किये गए हैं।

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि 2017-18 में 64 हज़ार करोड़ रुपए के कुल व्यय का 55% यानी क़रीब-क़रीब 35 हज़ार करोड़ रुपए जल-संरक्षण जैसे कामों पर खर्च किये गए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान इस तरह के जल-संरक्षण और जल-प्रबंधन उपायों के माध्यम से क़रीब-क़रीब 150 लाख हैक्टेयर भूमि को अधिक लाभ मिला है। जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सुनते हैं कि भविष्य में दुनिया में पानी को लेकर युद्ध होने वाले हैं। हर कोई यह बात बोलता है लेकिन क्या हमारी भी कोई जिम्मेवारी है? 

उन्होंने सवाल किया कि क्या हमें नहीं लगता कि जल-संरक्षण सामाजिक जिम्मेवारी होनी चाहिए? यह हर व्यक्ति की जिम्मेवारी होनी चाहिए। मोदी ने कहा कि हमें देखना होगा कि बारिश की एक-एक बूँद हम कैसे बचाएँ । भारतीयों के दिल में जल-संरक्षण कोई नया विषय नहीं है, किताबों का विषय नहीं है, भाषा का विषय नहीं रहा।

सदियों से हमारे पूर्वजों ने इसे जी कर दिखाया है। एक-एक बूँद पानी के महत्व को उन्होंने प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री ने आज ‘मन की बात’ में राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं, साथ ही युवाओं के लिए समर इंटर्नशिप का जिक्र किया । मोदी ने देशवासियों को रमजान और बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि वे सभी देशवासियों को रमज़ान के पवित्र महीने की शुभकामनाएँ देते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह अवसर लोगों को शांति और सद्भावना के संदेशों पर चलने की प्रेरणा देगा। मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध समानता, शांति, सद्भाव और भाईचारे की प्रेरणा शक्ति है। यह वैसे मानवीय मूल्य हैं, जिनकी आवश्यकता आज के विश्व में सर्वाधिक है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु में जाने का अवसर मिलता होगा तो देखें कि तमिलनाडु में कुछ मंदिर ऐसे हैं कि जहाँ मंदिरों में सिंचाई व्यवस्था, जल-संरक्षण व्यवस्था, सूखा-प्रबंधन, इसके बड़े-बड़े शिलालेख मंदिरों में लिखे गए हैं। मनारकोविल, चिरान महादेवी, कोविलपट्टी या पुदुकोट्टई सब जगह बड़े-बड़े शिलालेख आपको दिखाई देंगे।

उन्होंने गुजरात में अडालज और पाटन की रानी की वाव (बावड़ी) के साथ राजस्थान में जोधपुर में चाँद बावड़ी का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि अप्रैल, मई, जून, जुलाई का समय वर्षा के पानी को संग्रह करने का उत्तम अवसर होता है। इसलिये हम पहले से ही जितनी तैयारियाँ करें, उतना ही फायदा मिलता है। उन्होंने केरल में कुट्टूमपेरूर नदी को मनरेगा के काम करने वाले 7 हज़ार लोगों द्वारा 70 दिनों तक कड़ी मेहनत करके पुनर्जीवित किए जाने का जिक्र किया। उन्होंने फतेहपुर ज़िला में ससुर, खदेरी नाम की दो छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने का भी उल्लेख किया।

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