महाभियोग प्रस्ताव लाकर कांग्रेस ने खुदकुशी की- सुब्रमण्यम स्वामी

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नई दिल्ली, सोमवार, 23 अप्रैल 2018। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस के खारिज पर सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार (23 अप्रैल) को कहा कि इस नोटिस पर निर्णय लेने में दो दिन लेना ही नहीं चाहिए था, बल्कि जिस दिन विपक्ष ने इस प्रस्ताव के लिए राज्यसभा के सभापति (वेंकैया नायडू) को नोटिस दिया उसी दिन उन्हें इसे रद्द कर देना चाहिए था. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'उन्होंने (वेंकैया नायडू ने) बिल्कुल सही फैसला किया है. उन्हें निर्णय देने के लिए दो दिन की भी जरूरत नहीं थी. इस महाभियोग प्रस्ताव को शुरू में ही फेंक देना चाहिए था. कांग्रेस ने ऐसा करके खुदकुशी की है.'

ANI@ANI

He has decided correctly. He need not have taken two days to make the decision. It should've been considered null and void & thrown out from the beginning. Congress committed suicide by doing this: Subramanian Swamy on rejection of #ImpeachmentMotion notice againt CJI Dipak Misra

10:59 AM - Apr 23, 2018

वेंकैया नायडू ने नामंजूर किया महाभियोग प्रस्ताव
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को ‘पद से हटाने’ के लिए कांग्रेस एवं अन्य दलों की ओर से दिये गये नोटिस पर कानूनविदों से विस्तृत विचार विमर्श के बाद सोमवार (23 अप्रैल) को उसे नामंजूर कर दिया. राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार नायडू ने कांग्रेस सहित सात दलों के नोटिस को नामंजूर करने के अपने फैसले की जानकारी राज्यसभा के महासचिव देश दीपक वर्मा को दे दी है.

सीजेआई को पद से हटाने के प्रस्ताव पर नायडू ने किया था विचार-विमर्श
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने संबंधी कांग्रेस तथा अन्य दलों की ओर से दिए गए नोटिस पर बीते 22 अप्रैल को अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल सहित संविधानविदों और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया था. राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार नायडू ने याचिका को स्वीकारने अथवा ठुकराने को लेकर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा और विधायी मामलों के पूर्व सचिव संजय सिंह सहित अन्य विशेषज्ञों से कानूनी राय ली थी. 

अधिकारियों के अनुसार नायडू ने मामले की गंभीरता के मद्देनज़र हैदराबाद के अपने कुछ कार्यक्रमों को रद्द कर कानूनविदों के साथ बैठक की थी. सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने (वेंकैया नायडू ने) राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी विचार-विमर्श किया और उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी से भी बातचीत की.

7 दलों ने दिया था महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस
बीते 20 अप्रैल को कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों ने देश के प्रधान न्यायाधीश पर ‘कदाचार’ और ‘पद के दुरुपयोग’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था. महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 71 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे, जिनमें सात सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

महाभियोग के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, राकांपा, माकपा, भाकपा, सपा, बसपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सदस्य शामिल थे. यह कदम प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व वाली उच्चतम न्यायालय की एक पीठ द्वारा उन याचिकाओं को खारिज किये जाने के एक दिन बाद आया था, जिनमें विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की मृत्यु की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी.

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