कठुआ गैंगरेप: दिल्ली HC ने लगाई मीडिया को लताड़

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नई दिल्ली, शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जम्मू - कश्मीर के कठुआ जिले में सामूहिक बलात्कार के बाद मार दी गयी आठ वर्षीय बच्ची की पहचान जाहिर करने के मामले में आज कई मीडिया हाउसों को नोटिस जारी किए। साथ ही कहा कि आगे से किसी खबर में बच्ची की पहचान जाहिर नहीं की जानी चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी . हरि शंकर ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आई खबरों का स्वत : संज्ञान लेते हुए मीडिया हाउसों से जवाब मांगा है कि इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

कश्मीर के बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाली यह बच्ची अपने घर के पास से 10 जनवरी को लापता हो गयी थी। एक सप्ताह बाद उसका शव उसी इलाके से मिला।  मामले की जांच कर रही राज्य पुलिस की अपराध शाखा ने मामले में इसी सप्ताह सात आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोपपत्र तथा एक किशोर के खिलाफ पृथक आरोपपत्र दायर किया है। आरोपपत्र में रूह कंपा देने वाला घटनाक्रम बताया गया है। उसमें बताया गया है कि कैसे बच्ची का अपहरण कर उसे नशा दिया गया और हत्या करने से पहले एक धार्मिक स्थल पर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया ।  

आसिफा की दी जाती थी नशे की दवाई
आठ वर्ष की आसिफा के साथ एक एसपीओ और उसके दो साथियों ने रेप करने के बाद अधमरी बच्ची का गला घोंटकर उसे मार दिया। बच्ची को सात दिन तक भूखे पेट रखा गया और उसे बेहोश करने के लिए नशे की दवाई दी जाती थी। सिर्फ यही नहीं बल्कि क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार बेहोशी की हालत में ही बच्ची का रेप किया जाता था।

अब तक इस केस में करीब 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें 2 स्पेशल पुलिस ऑफिसर, एक हेड कॉन्सटेबल, एक सब इंस्पेक्टर, एक कठुआ निवासी और एक नाबालिग शामिल है। चार्जशीट के मुताबिक बच्ची को जनवरी में एक हफ्ते तक कठुआ जिला स्थित एक गांव के एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था और उसके साथ छह लोगों ने बलात्कार किया था।

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