Fake न्यूज कैंसर जैसी, जरूरत सर्जरी की- सुब्रमण्यम स्वामी

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नई दिल्ली, बुधवार, 11 अप्रैल 2018। फेक न्यूज मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा बयान दिया है. स्वामी ने कहा है कि फेक न्यूज कैंसर के जैसा हो गया है और इससे निपटने के लिए सर्जरी करने की जरूरत है. दरअसल पिछले दिनों कोलंबिया बिजनेस स्कूल में स्वामी साऊथ एशिया बिजनेस एसोसिएशन द्वारा आयोजित 14 वें वार्षिक भारतीय व्यापार सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गए थे, जहां पर उन्होंने यह बात कही. 

आजादी और प्रदत्त रोक-टोक के बीच संतुलन जरूरी
उन्होंने कहा, 'फेक न्यूज एक तरह का कैंसर बन गया है और हमें कुछ तरह की सर्जरी करनी है. एक लोकतांत्रिक देश में संविधान द्वारा दी जाने वाली अभिव्यक्ति की आजादी और प्रदत्त रोक-टोक के बीच संतुलन होना चाहिए. यहीं लकीर खींचना सरकारों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है.' उन्होंने कहा कि मीडिया अब सही मायने में मास मीडिया बन गया है. साइबर दुनिया ने तत्काल समाचार प्राप्त करना संभव बना दिया है लेकिन तेजी से फैलने वाली विरोधाभासी सूचना पर नजर रख पाना बहुत मुश्किल है. 

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों का दिया हवाला
स्वामी ने हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दिशा-निर्देश का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि अगर इसकी पुष्टि हो जाती है कि उन्होंने गलत समाचार दिया है तो उनकी मान्यता रद्द हो जाएगी. इस दिशा-निर्देश को बाद में वापस ले लिया गया था. स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही उल्लेख किया कि इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार पहले ही भारतीय प्रेस परिषद को दिया गया है. उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रतिस्पर्धा काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि पत्रकार नकारात्मकता के चलते फेक न्यूज चलाते हैं बल्कि वे एक राजनेता के दुश्मनों के इशारे पर राजनेता को बदनाम करने के लिए इसे एक सही खबर के रूप में पेश करने के लिए प्रेरित होते हैं. स्वामी ने कहा कि फेक और गलत खबरों से एक परिष्कृत तरीके से निपटा जाना चाहिए. 

क्या है पूरा मामला
3 अप्रैल को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि अखबार और न्यूज चैनलों पर फेक न्यूज लिखने वाले पत्रकारों की मान्यता को हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा. इस मामले में पीएम मोदी ने कहा था कि मीडिया के मामले में फैसले लेने का हक सिर्फ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को ही है और यह मुद्दा वहीं पर उठाया जाएगा.

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