वीरप्पन मारा जा चुका है फिर भी दूसरे कारणों से मारे जा रहे हाथी: SC

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नई दिल्ली, शनिवार, 07 अप्रैल 2018। दुर्घटनाओं और दूसरे कारणों से वन्य जीवों के मारे जाने की घटनायें कम करने के इरादे से देश में हाथियों के लिये गलियारा बनाने पर जोर देते हुये उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र से कहा कि वह इस संबंध में व्यावहारिक समाधान पेश करे। शीर्ष अदालत ने कहा कि चंदन तस्कर वीरप्पन द्वारा बड़े पैमाने पर शिकार किए जाने की वजह से दक्षिणी राज्यों में हाथियों की संख्या बहुत कम हो गई थी लेकिन उसकी मृत्यु के बाद इनकी संख्या बढ़ी थी परंतु अब उसकी वजहों से वे मारे जा रहे हैं।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र का प्रतिनिधत्व कर रहे अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कहा, ‘आपको हाथियों के लिये गलियारे के मुद्दे पर कुछ करना होगा। आप कोई समाधान खोजिये।’ पीठ ने कहा, ‘हम हाथियों से यह नहीं कह सकते कि उन्हें कहां जाना चाहिए। उनके लिये गलियारा होना चाहिए।’ पीठ ने रेलगाड़ियों द्वारा हाथियों के कटने की घटनाओं का हवाला देते हुये कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें न्यायालय के फैसले की आवश्यकता है।

पीठ ने सरकार से कहा, ‘वीरप्पन ने लगभग सारे हाथी मार दिये थे। वह मर गया और अब हाथियों की संख्या बढ़ी है। परंतु अब दूसरे कारणों से हाथी मारे जा रहे हैं। अत: आपको समाधान खोजना होगा।’ न्यायालय ने नाडकर्णी को दस दिन के भीतर इसका व्यावहारिक समाधान पेश करने का निर्देश देते हुये कहा कि मामले को इसके बाद सूचीबद्ध किया जाये। इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वकील ने पीठ से कहा कि हाथियों के लिये गलियारे बनाने ही होंगे।

शीर्ष अदालत देश भर में हाथियों के लिये गलियारे बनाने का मुद्दा उठाते हुये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। केन्द्र ने19 जनवरी को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को सूचित किया था कि वन्य जीव बोर्ड की स्थाई समिति हाथियों और दूसरे विलुप्त हो रहे वन्य जीवों के सुरक्षित आवागमन के लिये27 गलियारें बनाने सहित विभिन्न सुझावों पर विचार करेगी।

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