संसद में अवरोध के लिए सरकार ने विपक्षी दलों को ठहराया जिम्मेदार

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नई दिल्‍ली, गुरूवार, 05 अप्रैल 2018। लोकसभा में हंगामे के कारण लगातार 21वें दिन भी कुछ कामकाज नहीं हो सका। कांग्रेस ने खुद को अविश्वास प्रस्ताव समेत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार बताया तो सरकार ने बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरूआत से बने हुए गतिरोध के लिए मुख्य विपक्षी दल को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ चुका है और जब इसके समाप्त होने में एक दिन शेष बचा है तो किसी विशेष कामकाज की उम्मीद भी नहीं बची है। आज भी अन्नाद्रमुक के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके।

एक बार के स्थगन के बाद सदन की बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई तो तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्य पिछले दिनों की तरह ही कावेरी बोर्ड के गठन की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गये। हंगामे के बीच ही लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाए। सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शोर-शराबे के बीच ही कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव, दलितों और किसानों के मुद्दों पर, नीरव मोदी जैसे कारोबारियों द्वारा बैंकों का कर्ज लेकर देश छोड़ जाने जैसे सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।

माकपा के पी करुणाकरण ने कहा कि हम सभी विपक्षी दल हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार हैं। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू कराने के संबंध में एक नियम का जिक्र किया। उधर संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने आरोप लगाया कि पिछले 21 दिन से संसद के दोनों सदनों में कामकाज नहीं हो पा रहा है और इस गतिरोध के लिए कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है। केंद्रीय मंत्री द्वारा कांग्रेस और पार्टी के नेताओं को गतिरोध के लिए जिम्मेदार ठहराये जाने का मुख्य विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। अनंत कुमार ने अन्नाद्रमुक सदस्यों की नारेबाजी के बीच ही अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि भाजपा के सभी सांसदों ने बजट सत्र के दूसरे चरण के 23 दिन का वेतन-भत्ता नहीं लेने का साहसिक फैसला किया है। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग लोकतंत्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। वे मोदी सरकार को मिले जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस क्या कर रही है। लोकसभाध्यक्ष ने विपक्षी दलों द्वारा सरकार के खिलाफ दिये गये अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अव्यवस्था के बीच वे कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा दिये गये अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को आगे नहीं बढ़ा सकतीं। उन्होंने हंगामा कर रहे अन्नाद्रमुक सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने का आग्रह किया लेकिन वे नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू कराने में असमर्थता जताते हुए स्पीकर ने सदन की बैठक को दोपहर करीब 12:10 बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। 

बैठक स्थगित होने की घोषणा होते ही तेलुगूदेशम पार्टी के टी नरसिंहन और वाईएसआर कांग्रेस के वाई बी सुब्बारेड्डी को कुछ पर्चे फाड़कर उड़ाते हुए देखा गया। सबसे पहले उन्होंने ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। दोनों ही दल बजट सत्र के दूसरे चरण में पहले दिन से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होते ही अन्नाद्रमुक के सदस्य आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे और कार्यवाही शुरू होते ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

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