कांग्रेस की धुरी के बिना विपक्ष की एकता संभव नहीं- चव्हाण

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नई दिल्ली, रविवार, 25 मार्च 2018। कांग्रेस की धुरी के बिना विपक्ष की एकता संभव नहीं होने का दावा करते हुए कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि उत्तर प्रदेश उपचुनाव में भाजपा की उसके मजबूत विकेट पर हार से साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी हराया जा सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने वर्तमान भारतीय राजनीति में तीसरा मोर्चा उभरने की संभावना के बारे में पूछने पर कहा, ‘कांग्रेस के बिना विपक्ष हो ही नहीं सकता। कांग्रेस जहां एक आधार है वहीं दूसरा आधार भाजपा है। अब ऐसा नहीं हो सकता कि कांग्रेस को हटा कर विपक्ष बनाया जाये।’

उन्होंने माना कि देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस अपने साथ कितने विपक्षी दलों को ला पाती है। चव्हाण ने हाल में संपन्न महाधिवेशन में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि इसका साफ संदेश था कि जो काम शिमला सम्मेलन के बाद हो सकता है, वह 2019 में भी हो सकता है। महाधिवेशन में सोनिया ने ध्यान दिलाया था कि पार्टी ने पचमढ़ी में अन्य दलों के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला किया जबकि शिमला सम्मेलन में कांग्रेस ने गठबंधन करने पर सहमति जतायी थी।

संसद में तेदेपा और वाईएसआर कांग्रेस द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने और विपक्ष की एकजुटता को लेकर कांग्रेस द्वारा अभी तक अग्रणी भूमिका निभाते दिखायी नहीं देने के बारे में पूछे जाने पर चव्हाण ने कहा, ‘अभी ऐसा लग सकता है।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अभी अपनी टीम बनानी है। समय के साथ यह सब भी होगा, कार्यसमिति होगी, कोर टीम होगी, भीतरी टीम होगी। पहले से यह सब था पर राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद यह अस्थायी हो गया जिसे उन्हें स्थायित्व देना होगा। हर राज्य के लिए महासचिव बनेंगे और वे गठबंधन के लिए वहां के दलों से बातचीत करेंगे।

शिवसेना और तेदेपा सहित राजग के कुछ घटक दलों के अपनी सरकार के रवैये के खिलाफ हाल में आये बयानों के बारे में पूछने पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देखिए, उत्तर प्रदेश उपचुनाव के बाद सब हिल गये हैं। यह स्पष्ट संदेश गया है कि मोदी को उनके ही क्षेत्र में हराया जा सकता है। देखने वाली बात है कि मोदी के लिए गोरखपुर और फूलपुर से ज्यादा कोई मजबूत विकेट नहीं हो सकता। वर्तमान मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री द्वारा खाली की गयी सीटें... इससे ज्यादा मजबूत विकेट क्या हो सकता है? उसको यदि मजबूती से हरा दिया गया तो इसका मतलब है कि मोदी को भी हराया जा सकता है। गणित तो पहले ही बता रहा था कि उनके पास केवल 31प्रतिशत वोट हैं। अब यह बात साबित भी हो गयी (उपचुनाव के नतीजों से)। अब सवाल यही है कि मोदी अपने गठबंधन को कैसे एकजुट रख पायेंगे और हमें गठबंधन बनाने से क्या रोक पाएंगे?’’ 

उप्र चुनावों को लेकर यह अटकलें लगायी जा रही हैं कि भाजपा ने जानबूझ कर ढंग से चुनाव नहीं लड़ा ताकि ईवीएम विवाद पर विराम लग सके। इस बारे में पूछने पर चव्हाण ने कहा, ‘‘मैं इसे नहीं मानता। लोग तो यह भी कहते हैं कि योगी अपने को भावी प्रधानमंत्री की तरह पेश करने लगे थे, इसलिए उन्हें यह सबक सिखाया गया... पर यह सब गलत बात है।’’ 

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के जीत वाले गठबंधन में कांग्रेस का साथ नहीं होने के बारे में पूछने पर चव्हाण ने कहा कि यह दोनों दल साथ आयेंगे, क्या इस बात को पहले कभी सोचा जा सकता था। किंतु दोनों साथ आये और यह एक जीत का फार्मूला बन गया। हर राज्य के लिए जीत का अपना अलग फार्मूला होता है। हमारे राज्य महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा का साथ आना जीतने का फार्मूला है।

उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि विपक्ष में कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जिसकी पूरे देश में उपस्थिति है, भले ही वह कम-ज्यादा हो सकती है। चव्हाण ने माना कि जिस किसी राज्य में तीसरी शक्ति मजबूत है वहां कांग्रेस हाशिये पर चली गयी है जैसे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार या पश्चिम बंगाल। लेकिन यदि आप पूरे देश को मिला कर देंखेंगे तो हम ही सबसे बड़ा विपक्षी दल हैं। आप अभी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं कर सकते कि कांग्रेस की अनेदखी की जा सकती है या कांग्रेस अप्रासंगिक हो गयी है।

टीआरएस द्वारा विपक्ष की एकता के प्रयास के पीछे क्या कोई ‘अदृश्य हाथ ’ हो सकता है, इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता, पर ऐसा हो भी सकता है। केसीआर की क्या भूमिका है, कोई नहीं बता सकता।’’ यदि वे कांग्रेस को कमजोर करते हैं तो इससे भाजपा को ही फायदा मिलेगा। कर्नाटक चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिद्धारमैया को स्पष्ट तौर पर अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित किया है। उनके नेतृत्व में राज्य में चुनाव लड़ेंगे और राहुल गांधी भी अपनी भूमिका निभायेंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि यदि राज्य विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया तो उस हालात में जदएस महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। मैं इस बात को लेकर काफी चिंतित हूं कि यदि स्पष्ट फैसला नहीं आया तो यह लोग (भाजपा) चुनाव के बाद की जाने वाली जोड़तोड़ में काफी माहिर हैं। कर्नाटक में क्या जदएस भाजपा से हाथ मिला सकती है, इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘देवगौड़ा तो इसके बहुत खिलाफ हैं। किंतु कुमारस्वामी का पता नहीं।’

यह पूछे जाने पर कि राहुल गांधी ने उदयमान (रिसर्जेंट) कांग्रेस बनाने की बात है, उसमें चव्हाण की क्या भूमिका होगी और क्या वह केन्द्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं, उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से नेतृत्व का होगा। अभी राज्यसभा की सीट का मामला था जो कुमार केतकर को दी गयी... मैं अभी राज्य के मुद्दों में काफी व्यस्त हूं।

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