राजीव गांधी हत्याकांड: दोबारा नहीं खुल सकता मामला- CBI

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नई दिल्‍ली: सीबीआई ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड  के दोषी एजी पेरारिवलन की सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है। सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि सभी दोषियों को पिछले 24 सालों में चली कार्रवाई के दौरान कानून के अनुसार सजा दी गई है। एजी पेरारीवलन को अपनी उम्रकैद की सजा भोगनी चाहिए।

कोर्ट ने सीबीआई से मांगा था जवाब 
बता दें कि मई 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने में चार दोषियों पेरारिवलन, सान्थन, मुरगुन और नलनी को फांसी की सजा सुनवाई थी। जनवरी में हुई सुनवाई में पेरारिवलन के वकील गोपाल शंकरनारायण ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व आर भानुमति की पीठ के समक्ष कहा था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को मई 1999 का फैसला वापस लेने की मांग संबंधी याचिका दायर की है। इस याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा जाए। इस पर शीर्ष कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद सीबीआई व सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा था।

पेरारीवलन को फांसी की सजा सुना चु​का है कोर्ट 
सीबीआई ने कहा कि दोषी ने ये नहीं बताया कि वो कानून के कौन से प्रावधान के तहत कोर्ट के फैसले को वापस लेने की बात कर रहे हैं। सीबीआई के अनुसार राजीव गांधी हत्याकांड की जांच की हर स्तर पर जांच की गई है। सुप्रीम कोर्ट उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने AG पेरारीवलन को राजीव गांधी हत्याकांड में 1999 में दोषी माना था और फांसी की सज़ा सुनाई थी। याचिका में पेरारिवलन ने कहा था कि कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने के जुर्म में दोषी ठहराया है, जबकि वह साजिश में शामिल नहीं था। उसे नहीं मालूम था कि जो नौ वोल्ट की दो बैटरियां उसने खरीदीं थीं उनका उपयोग बम में किया जाएगा।

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