चुनावों में बढ़ रहा NOTA का इस्तेमाल

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पांच सालों में 1.33 करोड़ बार हुआ उपयोग

नई दिल्ली: साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद भारत में होने वाले चुनावों में एक क्रांतिकारी बदलाव आया. 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि बैलेट पेपर व ईवीएम में बदलाव लाते हुए नोटा का विकल्प शामिल किया जाए. इस एक आदेश के साथ लोगों को चुनावों में वोटिंग के दौरान नोटा (नन ऑफ द अबव- उपर्युक्त में से कोई नहीं) का विकल्प भी मिलने लगा. इससे उन लोगों को सुविधा हुई जो अपने मताधिकार का उपयोग तो करना चाहते हैं लेकिन किसी पार्टी विशेष को वोट नहीं देना चाहते.

नोटा बटन का प्रावधान पहली बार छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान, दिल्ली और मध्यप्रदेश के चुनावों में इस्तेमाल किया गया था. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेश्नल इलेक्शन वॉच (न्यू) चुनावों में कितनी बार नोटा का इस्तेमाल किया गया, इसके आंकड़ें पर नजर रखते हैं.

NOTA का 1.33 करोड़ बार इस्तेमाल

  • लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अब तक नोटा का करीब 1.33 करोड़ बार इस्तेमाल किया जा चुका है.
  • राज्य विधानसभा चुनावों में इस विकल्प का औसतन 2.70 लाख बार उपयोग किया गया.
  • गोवा के वालपोई और पणजी साल 2017 में हुए उपचुनावों में लोगों ने बड़ी संख्या में नोटा के ऑप्शन को चुना. दोनों ही स्थानों पर तीसरा सबसे अधिक वोट नोटा पर ही दिया गया था.
  • गोवा चुनाव में पणजी और वलपई निर्वाचन क्षेत्रों में नोटा वोट क्रमशः 301 (1.94 प्रतिशत) और 458 (1.99 प्रतिशत) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे.
  • साल 2014 में लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक नोटा का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में हुआ, जहां करीब छह लाख मतदाताओं ने अपने क्षेत्रों में सभी उम्मीदवारों को नकारते हुए ‘नोटा’ का बटन दबाया.
  • लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक वोटों की संख्या 46,559 तमिलनाडु में नीलगिरी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हैं और सबसे कम वोट 123 लक्षद्वीप में मिले.

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