त्रिपुरा चुनावः BJP की जीत के ट्रंप कार्ड साबित हुए याेगी

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लखनऊ: बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जादू त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चल गया है। त्रिपुरा की कुल 60 सीटाें में बीजेपी काे 40 सीटें मिली हैं जबकि 25 साल से सत्ता पर काबिज वाम मोर्चे की सरकार को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वाम मोर्चे काे 19 सीटें ही प्राप्त हुई हैं। वहीं बात करें कांग्रेस की ताे इस पार्टी का खाता भी नहीं खुला है। बता दें कि योगी ने त्रिपुरा में दो दिवसीय चुनाव प्रचार किया था। जिसमें उन्होंने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 8 रैलियां की थी।

भाजपा की जीत के ट्रंप कार्ड साबित हुए याेगी 
त्रिपुरा में भाजपा काे मिली प्रचंड जीत के लिए योगी ट्रंप कार्ड साबित हुए हैं। वामपंथी गढ़ में भाजपा हिंदुत्व के बल पर त्रिपुरा फतह करने मेें कामयाब रही है। पार्टी ने यहां हिन्दू वोटरों को लुभाने के लिए योगी का इस्तेमाल किया था। क्योंकि योगी की इमेज एक कट्टरपंथी हिंदूवादी नेता की है।

जीत के लिए भाजपा झोंकीं पूरी ताकत 
बता दें कि त्रिपुरा में 25 साल से लेफ्ट की सरकार थी और माणिक सरकार पिछले 20 साल से सीएम रहे हैं। ये पहला ऐसा मौका था जब भाजपा पूरे दमखम से मैदान में उतरी है। चुनाव में जीत के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंकीं थी। यहां भाजपा के सभी स्टार नेताओं ने रैली, रोड शो और जनसभाएं की थी। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, नितिन गडकरी, हेमा मालिन, राजनाथ सिंह, समृति ईरानी, शाहनवाज हुसैन जैसे दिग्गज नेता शामिल रहे थे।

गुजरात चुनाव में भी याेगी ने निभाई थी अहम भूमिका
पिछले साल संपन्न गुजरात चुनाव में योगी ने प्रचार में अहम भूमिका निभाई थी। जिसके बाद सीएम योगी के बढ़ते कद को देखते हुए पार्टी ने उन्हें वामपंथियों के गढ़ त्रिपुरा में स्टार प्रचारक बनाया था है। ऐसा कहा गया था कि खुद वहां के नेताओं ने सीएम योगी की जनसभाओं के लिए मांग की थी।

याेगी का पहले से ही जुड़ा है त्रिपुरा से गहरा रिश्ता
बता दें कि योगी इसलिए भी महत्वपूर्ण रहे क्योंकि त्रिपुरा से उनका गहरा रिश्ता रहा हैं। योगी यहां पहले भी आते रहे हैं। वे यहां के नाथ संप्रदाय से जुड़े रहे हैं। दरअसल त्रिपुरा में 35 परसेंट बंगाली नाथ संप्रदाय के लोग हैं। यह वही नाथ संप्रदाय है जिसे सीएम योगी ने अपनाया है। गोरखपुर का गोरक्षनाथ मंदिर भी नाथ संप्रदाय का ही है। लिहाजा बीजेपी की रणनीति है कि इस वोट बैंक को सीएम योगी की रैलियों से साधा जाए।

इसके अलावा नाथ संप्रदाय को जहां केंद्र में ओबीसी श्रेणी में रखा गया है, वहीं त्रिपुरा में यह सामान्य श्रेणी का ही हिस्सा है। यह भी एक वजह है कि त्रिपुरा बीजेपी सीएम योगी की रैलियों को लेकर उत्सुक थे। बता दें कि उनकी इमानदारी, कठोर छवि और उनकी वेशभूषा लोगों के अन्दर उत्सुकता पैदा करती है। योगी आदित्यनाथ को देखने के लिए भी लोगों में उत्सुकता रहती है।

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