भाजपा को झूठ बोलने में 100 में से 100 अंक- लालू

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पटना: चारा घोटाले मामलों में झारखंड की राजधानी रांची की जेल में बंद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बजट के बहाने झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए तंज कसा है. राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने शनिवार को आम बजट में किए गए वादों पर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, "जैसे हरिद्वार से बंगाल की खाड़ी तक गंगा मैया क्लीन होकर अविरल हो गईं, जैसे देश में 100 स्मार्ट सिटी बनकर तैयार हैं,

15 लाख रुपये मिल गए, वैसे ही किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी, वैसे ही गरीबों को मेडिक्लेम मिलेगा." उन्होंने भाजपा पर झूठ बोलने में 100 में से 100 अंक देने की भी बात लिखी है. उल्लेखनीय है कि लालू इन दिनों रांची की एक जेल में बंद हैं. जेल जाने से पहले उन्होंने अपने समर्थकों और बिहार के लोगों से ट्विटर पर संदेश भेजते रहने की बात कही थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि उनका ट्विटर उनके कार्यालय या परिवार के लोग संचालित करेंगे, जिससे उनका संदेश लोगों तक पहुंचता रहेगा. इससे पहले भी जेल में बंद रहने के बावजूद लालू ट्विटर के जरिए विरोधियों पर निशाना साधते रहे हैं.  

जेल में बंद हैं लालू यादव
देवघर कोषागार मामले में लालू यादव साढ़े तीन साल की कैद की सजा काट रहे हैं. वे इस समय रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. बीती 6 जनवरी को रांची की सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला से जुड़े एक मामले (देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री पर इस मामले में पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया था.

क्या है चाईबासा मामला
देवघर कोषागार की तरह ही चाईबासा कोषागार से भी 1992-93 में 67 फर्जी तरीके से 33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई थी. 1996 में इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई थी और लालू प्रसाद यादव व डॉ. जगन्नाथ मिश्रा समेत 76 लोगों को आरोपी बनाया गया था. 76 में से 14 लोगों का निधन हो चुका है. मामले में तीन लोग दीपेश चांडक, आरके दास व शैलेश प्रसाद सिंह सरकारी गवाह बन गए हैं.

क्या है मामला
वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा संख्या आरसी 64 /1996 दर्ज किया था और लगभग 21 वर्षों बाद इस मामले में 23 दिसंबर को फैसला आया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर 2017 को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आइएएस के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था.

देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के फर्जीवाड़े के मामले से जुड़े इसी मुकदमे में 23 दिसंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र एवं साधना सिंह को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.

अदालत के फैसले पर भड़के तेजस्वी
अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा था कि लालू यादव को फंसाया गया है. बिहार का जनता लालू के निर्दोष मानती है. उन्होंने आरोप लगाया था कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार में कई दागी बैठे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

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