रेप केस में SC ने महमूद फारुकी को दी राहत

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नई दिल्लीः अमेरिकी की एक छात्रा से रेप के मामले में बरी हो चुके बॉलीवुड फिल्म ‘पीपली लाइव’ के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को एक और बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी शोध छात्रा द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कई सवाल किए हैं. शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बोबडे ने कोर्ट में शिकायत करने वाली लड़की से सवाल किया,  'कितनी बार आप (लड़की) फारूकी के साथ घूमे? कितनी बार दोनों (फारूकी और लड़की) ने साथ ड्रिंक पी? इस घटना के बाद भी लड़की ने फारुकी को 'आई लव यू' का सन्देश क्यों भेजा? कोई रेप पीड़िता किसी आरोपी को ऐसे सन्देश क्यों भेजेगी?'

अजनबी नहीं थी लड़की और फारूकी
कोर्ट ने आज हुई सुनवाई में जस्टिस ने माना कि फारूकी और वह लड़की एक-दूसरे से अजनबी नहीं थे. दोनों ना सिर्फ अच्छे दोस्त थे बल्कि कई बार साथ में ड्रिंक कर चुके थे. कोर्ट ने यह भी माना कि घटना से पहले दोनों के बीच सेक्सुअल इंटरेक्शन भी था. सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फारुकी के बरी के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि हाई कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही था. कोर्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी जो एक ‘‘अच्छी तरह लिखा गया फैसला’’ है.

Supreme Court today dismissed the appeal filed against the acquittal of Peepli Live director Mahmood Farooqui in a 2015 alleged rape case pic.twitter.com/2FZ5fp7rmh

— ANI (@ANI) January 19, 2018

क्या है पूरा मामला
दरअसल वर्ष 2015 में 19 जून को एक महिला ने फारूकी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. महिला ने आरोप लगाया था कि फारूकी ने 28 मार्च 2015 को सुखदेव विहार स्थित अपने आवास पर उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस को दर्ज कराए गए बयान में महिला ने खुद को कोलंबिया विश्वविद्यालय में शोध कर रही छात्रा बताया था. महिला के आरोपों के बाद फारूकी को हिरासत में लिया गया था. पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई पूछताछ में फारूकी ने रेप की घटना से साफ इनकार कर दिया था.

कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा
फिल्म 'पीपली लाइव' के सह निर्देशक महमूद फारूकी को विदेशी महिला से रेप (376) के जुर्म मे साकेत कोर्ट ने 7 साल सजा सुनाई गई थी.  साथ ही दोषी पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था. सरकारी वकील ने कोर्ट से गुजारिश की थी कि इस मामले में फारूकी को अधिकतम उम्रकैद की सजा दी जाए क्योंकि दोषी ने पीड़िता को शारीरिक ही नहीं बल्कि वो मानसिक आघात दिया है जो उसे ताउम्र झेलना पड़ेगा.

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