'कर्मकांड से बढ़ेगी खेती और रोजगार'- BJP सांसद

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नई दिल्ली : मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया है. इस ओर तेजी से काम भी किए जा रहे हैं. इसी क्रम में बीजेपी के एक सांसद ने ऐसा उपाय खोज निकाला है जिसके आधार पर ना केवल ग्रामीण नौजवानों को रोजगार मिलेगा, बल्कि खेती की भी आमदनी बढ़ेगी. साथ ही इससे  गांवों की आर्थिक स्थिति, ग्रामीण जीवन और सामाजिक सद्भाव को भी ताकत मिलेगी. भदोही से बीजेपी सांसद तथा भारतीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए संस्कृत विद्यालयों में कर्मकांड की शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की है.

मानव संसाधन मंत्रालय को लिखा पत्र
बीजेपी के कार्यकाल में सरकारें संस्कृत और कर्मकांड को बढ़ावा देने पर ज्यादा जोर दे रही हैं. पहले मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मकांड और ज्योतिष की शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया था, अब यूपी से बीजेपी सांसद ने कर्मकांड की शिक्षा पर जोर दिया है. सांसद ने इस के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर संस्कृत विद्यालयों में कर्मकांड की शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की है. उन्होंने तर्क दिया है कि इससे खेती से जुड़े नौजवानों को रोजगार मिलेगा. 

संस्कृत विद्यायलों को दिए एक करोड़
भदोही से बीजेपी सांसद और बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह का कहना है कि कर्मकांड को बढ़ावा देने से उन नौजवानों को रोजगार मिलेगा जो खेती से जुड़े हुए हैं. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने संसदीय निधि से संस्कृत विद्यायलों को भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये दिए हैं, ताकि इन भवनों में कर्मकांड की शिक्षा दी जा सके. उनका तर्क है कि कर्मकांड में जितनी चीजें इस्तेमाल की जाती हैं, वे सब खेती से पैदा होती हैं. कर्मकांड में खेती के विस्तार और गृहस्थ जीवन के बारे में शिक्षा दी जाती है. 

विदेशों में भी कर्मकांड की भारी मांग
किसान नेता ने तर्क दिया है कि कर्मकांड का संस्कृत का बुनियादी तत्व नहीं है, बल्कि कर्मकांड का महत्व सीधे तौर से कृषि से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि भदोही के संस्कृत  विद्यालयों में कर्मकांड की शिक्षा पहले ही शुरू की जा चुकी है. इससे ना केवल गांव के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, साथ ही गांव की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कर्मकांड की भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारी मांग है. उन्होंने तर्क दिया कि विदेशों में तो कर्मकांड के बदले बहुत अच्छा पारिश्रमिक मिलता है. भाजपा सांसद ने कहा कि कर्मकांडियों की कमी की वजह से सामाजिक सद्वभाव खत्म हो रहा है. कर्मकांड में जितनी भी चीजें इस्तेमाल होती है वे सारी खेती कर उगाई जाती हैं. 

2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे कदम उठाकर कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में हिन्दुस्तान की आजादी के 75 साल पूरे होंगे. क्या हम, राज्य सरकारें और किसान यह संकल्प कर सकते हैं कि आजादी के 75 साल पूरे होने तक हम किसान की आय को दोगुना कर देंगे. यह बहुत कठिन काम नहीं है. एक बार तय कर लें तो ऐसा हो सकता है. 

एक तरफ सरकारें और उनके मंत्री किसानों की आमदनी बढ़ाने के तर्क दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर हालात ये हैं कि उत्तर प्रदेश में ही किसानों का आलू 20 पैसे किलो बिक रहा है. आलू की कम कीमत से परेशान किसान आलू को सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं. बीते शुक्रवार को तो किसानों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास, राज निवास तथा विधानसभा भवन के सामने आलुओं का ढेर लगा दिया. रात में किसान ट्रेक्टर-ट्रॉलियों में आलू भर कर लाए और लखनऊ की सड़कों पर बिखेर कर चले गए. 

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