कुमार विश्‍वास ने गोपाल राय को कहा 'माहिष्मति'

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नई दिल्‍ली : आम आदमी पार्टी (आप) के नेता गोपाल राय द्वारा 'बागी नेता' कुमार विश्वास पर नगर निगम चुनावों के बाद दिल्ली में केजरीवाल सरकार गिराने का षड्यंत्र रचे जाने का आरोप लगाए जाने के बाद आज उनकी तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. उन्‍होंने राय के इस बयान पर कहा, 'इस माहिष्‍मती की शिवगामी देवी कोई और है. हर बार नए कटप्‍पा यहां पैदा किए जाते हैं'.

उन्‍होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि '5 राज्‍यों के प्रभारी, दिल्‍ली के प्रदेश अध्‍यक्ष, विधायक और मंत्री गोपाल राय को कार्यकर्ताओं को मीर जाफर कहते हैं, आज सात महीने के बाद उनकी कुंभकर्णी नींद जागी है, जिस पर पार्टी ने उनके बयान से किनारा कर लिया है'. 

उन्‍होंने आगे कहा, 'दरअसल, इस माहिष्‍मती की शिवगामी देवी कोई और है. हर बार नए कटप्‍पा यहां पैदा किए जाते हैं. मेरा उनसे अनुरोध है कि नए-नए कांग्रेस और भाजपा से आए हुए जो गुप्‍ता बंधु हैं, उनके 'योग' 'दान' का कुछ आनंद लें. मेरे शव के साथ छेड़छाड़ न करें. पिछली बार बाबरपुर में रैलियां करके मैं कार्यकर्ताओं के साथ उन्‍हें जितवाने के लिए गया था. इस बार सुशील गुप्‍ता की रैली कराएं. वहां से सांसद बनें, प्रधानमंत्री बनें और किम जोंग ने विश्‍व को भी बहुत तंग कर रखा है. लगे हाथों यूनाइटेड नेशंस के अध्‍यक्ष भी बन जाएं'.

दरअसल, राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद केजरीवाल सरकार के खिलाफ क्षोभ जताने के एक दिन बाद कवि-नेता कुमार पर पार्टी ने जोरदार पलटवार किया था. इस पर आम आदमी पार्टी की तरफ से उसके दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने दावा किया कि पिछले वर्ष अप्रैल में एमसीडी चुनावों के बाद 'सरकार को गिराने का प्रयास किया गया और उस षड्यंत्र के केंद्र में कुमार विश्वास थे'. उन्होंने फेसबुक के लाइव सत्र में कहा, 'इस बारे में कुछ विधायकों के साथ अधिकतर बैठकें उनके आवास पर हुईं. कपिल मिश्रा उसका हिस्सा थे और बाद में उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया'. राय ने कहा, 'वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने हर संभव सार्वजनिक मंच से पार्टी पर प्रहार किए. क्या इस तरह के व्यक्ति को राज्यसभा भेजा जा सकता है?' इससे पहले विश्वास ने ट्वीट किया था कि वीडियो में उन्होंने जो मुद्दे उठाए, उन पर वे पुनर्विचार नहीं करेंगे.

उल्‍लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने बुधवार को अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के तौर पर संजय सिंह, सुशील गुप्ता और एनडी गुप्ता को नामित किया था. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई एक बैठक में यह निर्णय लिया गया. संजय सिंह पार्टी गठन के समय से ही उससे जुड़े हुए हैं, जबकि सुशील गुप्ता दिल्ली के एक कारोबारी हैं.

इसके बाद पार्टी के इस निर्णय से नाराज कुमार विश्‍वास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि 'पिछले कुछ समय से अरविंद केजरीवाल के कई निर्णय चाहें वो सर्जिकल स्‍ट्राइक हो, चाहें आंतरिक भ्रष्‍टाचार से आंख फेरना हो, चाहे पंजाब में अतिवादियों के प्रति सॉफ्ट रहना हो, टिकट वितरण में गड़बडी का मामला हो, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो, चाहे सैनिकों का विषय हो या जेएनयू का विषय हो, मैंने जो-जो सच बोला आज उसका पुरस्‍कार मुझे दंड स्‍वरूप दिया गया. इसके लिए मैं स्‍वयं का आभार व्‍यक्त करता हूं. -मैं ये मानता हूं कि ये नैतिक रूप से एक कवि की, एक मित्र की, एक सच्‍चे आंदोलनकारी और क्रांतिकारी की जीत है'.

कुमार ने कहा, 'मैं पिछले 40 वर्ष से मनीष सिसोदिया, 12 वर्ष से अरविंद केजरीवाल, 7 साल से कार्यकर्ताओं के साथ काम कर रहे और पांच साल से लगातार पार्टी के हर विधायक के साथ रैलियां कर-करके, ट्वीट कर करके, मीडिया में बहस कर करके जिन्‍होंने पार्टी को आज खड़ा किया है, ऐसे महान क्रांतिकारी, आंदोलनकारियों की आवाज सुशील गुप्‍ता को राज्‍यसभा में भेजने के लिए अरविंद केजरीवाल ने चुना है. इसके लिए मैं अरविंद जी को बधाई देता हूं'.

उन्‍होंने कहा, 'एक दूसरे एनडी गुप्‍ता को भी पार्टी ने राज्‍यसभा के लिए भेजा गया है, इसके लिए भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को बधाई'. उन्‍होंने आरोप लगाया था कि 'कुछ माह पहले में मुझे राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बुलाकर अरविंद केजरीवाल ने कहा था, आपको मारेंगे पर शहीद नहीं होने देंगे. मैं अपनी शहादत स्‍वीकार करता हूं'.

इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि 'युद्ध का एक नियम होता है कि शहीदों के शव से छेड़छाड़ नहीं की जाती. आपसे (अरविंद केजरीवाल से) असहमत होकर वहां (आम आदमी पार्टी में) जीवित रहना मुश्किल है. सबको लड़ने ही पड़े अपने-अपने युद्ध, चाहे राजा राम हों चाहे गौतम बुद्ध. सबकी लड़ाईयां अकेली हैं. मैं अपनी लड़ रहा हूं, आप अपनी लड़ रहे हैं'.

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