भारतीय राजनीति के 'अटल' के जीवन से जुड़ी 11 अहम बातें

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नई दिल्लीः जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तो 31 मई 1996 को ससंद में अपनी सरकार के विश्वास मत के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया था, वह कालजयी रचना बन गया. उस भाषण के दौरान अटल ने अपने संख्या बल के सामने खुद के कमतर होने की बात को स्वीकारते हुए राष्ट्रपति को इस्तीफा देने की घोषणा भरे सदन में की थी. इस्तीफे से पहले अटल जी ने जो बातें कहीं वह उस समय के राजनेताओं के जहन में सदा के लिए बस गई और उनकी नजर में अटल जी का कद और बढ़ गया.

जब अटल जी संसद में बोलना शुरू करते तो कोई सदस्य ऐसा नहीं था जो उनकी बात के बीच में बोलता. सियासत की काली कोठरी में पांच दशक बिताने के बाद भी उनके दामन पर कभी एक दाग नहीं लगा अपने भाषण की शुरुआत में अटल जी ने कहा  

  • ''कई बार यह सुनने में आता है कि वाजपेयी तो अच्छा लेकिन पार्टी खराब....अच्छा तो इस अच्छे बाजपेयी का आप क्या करने का इरादा रखते हैं? 
  • ''आज प्रधानमंत्री हूं, थोड़ी देर बाद नहीं रहूंगा, प्रधानमंत्री बनते समय कोई मेरा हृदय आनंद से उछलने लगा ऐसा नहीं हुआ, और ऐसा नहीं है कि सब कुछ छोड़छाड़ के जब चला जाऊंगा तो मुझे कोई दुख होगा....''
  •  ''मैं 40 साल से इस सदन का सदस्य हूं, सदस्यों ने मेरा व्यवहार देखा, मेरा आचरण देखा, लेकिन पार्टी तोड़कर सत्ता के लिए नया गठबंधन करके अगर सत्ता हाथ में आती है तो मैं ऐसी सत्ता को चीमटे से भी छूना पसंद नहीं करूंगा.''
  • ''हमारे प्रयासों के पीछे 40 सालों की साधना है, यह कोई आकस्मिक जनादेश नहीं है, कोई चमत्कार नहीं हुआ है, हमने मेहनत की है, हम लोगों के बीच गए हैं, हमने संघर्ष किया है, यह पार्टी 365 दिन चलने वाली पार्टी है. यह कोई चुनाव में कुकरमुत्ते की तरह खड़ी होने वाली पार्टी नहीं है. ''
  • राजनीति में जो कुछ हो पारदर्शी हो, दल अगर साथ आते हैं, तो कार्यक्रम के आधार पर आए हिस्सा बांट के आधार पर नहीं....बैंकों में लाखों रुपये जमा किए जाएं इसके लेकर नहीं

 

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