शहीद प्रगट सिंह का अंतिम संस्कार आज

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इंद्री: जम्मू कश्मीर के राजौरी सेक्टर में हुई फायरिंग मेें 3 जवानों सहित करनाल के रंबा गांव के प्रगट सिंह भी शहीद हो गए। शनिवार शाम 5 बजे प्रगट के शहीद होने की खबर से पूरे गांव में गम का माहौल है। शहीद प्रगट सिंह का शव रंबा गांव में आज दोपहर बाद लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

12 दिसंबर को छुट्टी बिताकर लौटे थे शहीद प्रकट सिंह
साल 1987 में जन्मे परगट सिंह ने साल 2006 में आर्मी ज्वाइन की थी। दसवीं के बाद परगट सिंह ने करनाल में आईटीआई में इलेक्ट्रानिक की ट्रेड से परीक्षा पास की। इसके बाद वह आर्मी की सिक्ख रेजिमेंट में भर्ती हो गए थे। शहीद प्रगट सिंह ने 12 साल पहले सेना में सिपाही के पद पर नियुक्ति ली थी। अव वे सूबेदार के पद पर तैनात थे। 12 दिसंबर को ही प्रगट सिंह छुट्टी बिताकर घर से ड्यूटी पर गया था। 

आखिरी बार पत्नी से हुई थी बात 
प्रगट सिंह की पत्नी रमनदीप कौर का कहना है कि उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। सुबह पत्नी से आखरी बार बातचीत के दौरान अचानक प्रगट ने फोन काट दिया और शाम को 5 बजे के करीब प्रगट के पिता को कम्पनी के सीओ ने सूचना दी कि उनका बेटा शहीद हो गया है। 

5 साल के बेटे को नहीं मालूम कि अब नहीं आएंगे उसके पापा
शहीद प्रगट सिंह की शादी हो चुकी है और उसका 5 साल का एक बेटा है। बेटे को मालूम ही नहीं है कि पापा अब कभी नहीं आएंगे। शहीद प्रगट सिंह के पिता इफको से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके पिता इफको से सेवानिर्वित हुए हैं। प्रगट सिंह की मां सुखविंद्र कौर ने बताया कि शुक्रवार रात 10 बजे प्रगट सिंह का फोन आया था। 10 मिनट तक बात की थी। कह रहा था सब ठीक है। कल सुबह फोन करूंगा, लेकिन फोन नहीं आया। शाम पांच बजे ही पता चला कि प्रगट शहीद हो गया है। वह हमेशा ही कहता था मां तेरे बिना कुछ नहीं। तू अपना ख्याल रखना। 

परिवार ने की बदला लेने की मांग
देश की रक्षा में शहीद हुए सैनिक की शहादत पर पूरे देश को गर्व हैं, वहीं पूरे गांव में गम का माहौल भी है। शहीद प्रगट के पिता का कहना है कि उनका बदला पूरा होना चाहिए तभी उनकी आत्मा को शांति मिल पाएगी। पाकिस्तान के दोगुने जवान मारने चाहिए। इस बार पीएम मोदी कुछ नहीं कर रहे, सर्जिकल स्ट्राइक दोबारा होनी चाहिए। 

सबसे छोटे थे प्रगट सिंह
शहीद प्रगट सिंह तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। प्रगट सिंह के दादा जगीर सिंह का कहना है जब भी सेना में ड्यूटी पर जाता था तभी यह कहकर जाता था मैं जल्दी आ जाऊंगा अपना ख्याल रखना। 95 साल के दादा जगीर सिंह अपने आंसू रोक नहीं पा रहे हैं। दादी प्यार कौर को यकीन ही नहीं हो रहा कि जिसे गोद में खिलाया उसका शव कैसे देख पाएगी।

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