निर्भया कांड की पांचवीं बरसी, आज भी इंसाफ की राह देख रहा परिवार

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नई दिल्ली: दिल्ली में निर्भया कांड के शनिवार को पांच साल पूरे हो रहे हैं. 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षिय निर्भया के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को हिला दिया था. निर्भया के साथ चलती बस में क्रूरतम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया. घटना के बाद 13 दिन तक निर्भया मौत से जूझती रही और अंत में इलाज के दौरान सिंगापुर में दम तोड़ दिया था.

इस भयानक घटना ने दिल्ली को पूरी तरह से झकझोर दिया था. लेकिन अभी तक निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने के बाद भी फैसले पर अमल नहीं हुआ है. कानूनी खामी और मानवाधिकार और दोषियों के अधिकार के चलते दरिंदे फांसी की सजा से दूर हैं. उन्हें सूली पर कब लटकाया जाएगा कोई निर्धरित समय नहीं है.

दरअसल जब 16 दिसंबर को दिल्ली की सुनसान सड़क पर जब इस घटना को अंजाम दिया गया तो मानों कुछ पल के लिए दिल्ली की सांसे थम सी गई थी. तब घटना पर न्यायपालिका ने चुस्ती दिखाते हुए विशेष अदालतों का गठन किया और जल्द से जल्द सुनवाई शुरू शुरू हुई. घटना की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया और साकेत कोर्ट में प्रति दिन सुनवाई चली. ट्रायल कोर्ट ने 9 महीने में 80 से ज्यादा गवाह और 130 सुनवाई के बाद 13 दिसंबर को 2013 मामले में आरोपी विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, मुकेश व पवन को फांसी की सजा सुनाई. अब मामला हाई कोर्ट में चला गया.

इसी बीच घटना के पांचवें आरोपी राम सिंह 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली. हाईकोर्ट ने भी इस मामले में तत्परता दिखाते हुए केवल छह महीने में ही अपील का निपटारा कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल रखा. दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 मार्च 2014 को अपना फैसला सुना दिया. हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों ने 15 मार्च 2014 को सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे दी.

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट फैसले के खिलाफ दोषियों की अपील को स्वीकरते हुए फांसी की सजा पर रोक लगा दी. लगभक दो वर्स तक चली लंबी सुनवाई के बाद 5 मई 2017 को सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. लेकिन दोषी कोई न कोई तर्क देकर याचिका दायर कर देते हैं और सजा पर अमल रूक जाता है.

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