अनसूया साराभाई को Google ने Doodle के जरिए किया याद

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नई दिल्ली: गूगल ने शनिवार को डूडल के जरिए मजदूरों के हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाली अनसूया साराभाई को उनके 132वें जन्मदिन पर याद किया. अनसूया साराभाई भारत में महिला श्रम आंदोलन की अग्रणी थीं. 1920 में उन्होंने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (मजदूर महाजन संघ) की स्थापना की, जो कपड़ा कामगारों का भारत का सबसे पुराना यूनियन है. अनसूया साराभाई का जन्म अहमदाबाद निवासी साराभाई परिवार में 11 नवंबर, 1885 को हुआ था. उनका परिवार काफी संपन्न था. साराभाई परिवार दवा उद्योगपतियों और व्यापारिक लोगों का एक धार्मिक परिवार था. जब वह नौ साल की थीं तब उनके माता-पिता का निधन हो गया. उन्हें और उनके भाई-बहन को चाचा के साथ रहने के लिए भेज दिया गया.

महज 13 साल की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया. लेकिन जीवन का ये नया पड़ाव भी दुखों का पहाड़ साथ लेकर आया. उनका विवाह सफल नहीं हो पाया. इस दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. विवाह टूटने के बाद अनसूया अपने भाई की मदद से इंग्लैंड डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए चली गईं. जहां उन्हें एहसास हुआ कि डॉक्टर बनने की प्रक्रिया में जानवरों को कट लगाना आदि उनसे नहीं हो सकेगा, क्योंकि किसी को नुकसान पहुंचाना उनके जैन धर्म के खिलाफ है. इसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में एडमिशन ले लिया.

इंग्लैंड में रहते हुए वे जॉर्ज बरनार्ड शॉ, सिडनी वेब्ब जैसे लोगों के संपर्क में आईं, जिसने उनकी सोच पर गहरा प्रभाव डाला. भारत वापस आने के बाद अनसूया ने स्कूल खुलवाए और महिलाओं के लिए शौचालय बनवाए.

इसके बाद मजदूरों के हितों के लिए कार्य करने का निर्णय लिया. 1914 में उन्होंने मजदूरों को संगठित करने में मदद की और फिर 1918 में मजदूरों के हित के लिए एक महीने तक हड़ताल चली. इस हड़ताल में अनसूया भी शामिल रहीं. उनका साथ महात्मा गांधी ने भी दिया. जिसके बाद आखिरकार मजदूरों की मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई.

मजदूरों के हक के लिए लड़ने और समाज में सुधार के लिए उन्होंने जो काम किए उसके लिए अनसूया साराभाई को आज भी याद किया जाता है.

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