मैक्सिको सिटी कभी था दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, दिल्ली ने क्या सीखा?

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नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों प्रदूषण के आपातकाल से गुजर रही है. हवा में घुल रहा जहर हमारे फेंफड़ों में बिना चाहे पहुंच रहा है. हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते है. कोर्ट, एनजीटी और मानवाधिकार आयोग की फटकार के बाद सरकार ने कुछ कदम उठाए है. निर्माण कार्यों पर रोक लगी है, ट्रकों की शहर में एंट्री बैन कर दी है.

ऑड-ईवन लागू करने की बात कही जा रही है. सरकार द्वारा उठाए गए कदम हवा में लगातार घुलते इस जहर को कम करने में कितने कारगर साबित होंगे यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश है जहां लोगों ने ऐसी मुसीबत का सामना किया है. साल 1992 में संयुक्त राष्ट्र ने मैक्सिको सिटी को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित कर दिया था. लेकिन पिछले 25 सालों में यहां हवा की गुणवत्ता में काफी प्रगति हुई है. 

इंडियन एक्सप्रेस में लिखे लेख में भारत में मैक्सिको की राजदूत मेल्बा प्रिआ ने बताया कि वह किस प्रकार इन दिनों नई दिल्ली में वैसे ही माहौल से गुजर रहीं हैं जिसका सामना उन्होंने वह साल 1990 और उसके आसपास अपने शहर मैक्सिको सिटी में किया था. मेल्बा प्रिआ ने बताया कि कैसे दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर ने अपने को उस संकट से उबारा था. मेल्बा ने अपने लेख में लिखा है कि मैक्सिको की राजधानी मैक्सिको सिटी एक घाटी में स्थित है, जो जहरीली हवा से बचने के लिए कठिन बना देती है. 1990 के दशक के शुरुआती दिनों में मैक्सिको सिटी के निवासियों को पहली बार प्रदूषण के कारण होने वाली तबाही की सीमा के बारे में पता चला था. तभी से ही स्थानीय सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिए युद्धस्तर पर कई तरह के अनिवार्य किए उपाय हैं.

  • शहर की हर कार में catalytic कन्वर्टर्स लगाए गए. यह कनवर्टर वाहन के इंजन से निकलने वाली विशैली गैसों को कनवर्ट कर बाहर निकालता 
  • हर 6 महीने में कार उत्सर्जन का सत्यापन अनिवार्य किया गया
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और बेहतर बनाया गया, मेट्रों लाइनों का विस्तार हुआ.
  • मेट्रोबस नाम का बस ट्रांजिट प्रोगाम चलाया गया
  • सड़क पर वाहनों की भीड़ को कम करने के लिए "हो ना सर्कुलो" (मोटे तौर पर, कार के बिना एक दिन) नाम की मुहिम भी चलाई
  • चार अलग-अलग श्रेणियों में नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने क्रियाओं में निर्धारित किया, जिनमें सिफारिशें, परिवहन, सेवाएं, और उद्योग शामिल थे
  • स्कूलों और सरकारी संस्थानों को आउटडोर एक्टिविटी कम करने के लिए कहा गया. 
  • कुछ वाहनों पर सुबह के 5 बजे से रात के 10 बजे तक चलने में प्रतिबंध लगाया गया.
  • कई तरह के उद्योग घंधों को सीमित कर दिया गया, जब तक की प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ
  • मैक्सिको सिटी सरकार ने हाल ही में सी 20 समूह में 12 अन्य शहरों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, 2025 तक केवल शून्य उत्सर्जन बसों की खरीद और यह सुनिश्चित करने के लिए कि शहर 2030 तक जीवाश्म ईंधन मुक्त है.

एक सच यह भी
यहां हम आपको एक जानकारी यह भी दे देते हैं कि ऑड-ईवन फार्मूला मेक्सिको की राजधानी में सबसे पहले 1984 में लागू किया गया था जो 1993 तक चला. इसका पालन न करने वालों को दो हज़ार रुपये से लेकर चार हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया. योजना के लागू करने के तुरंत बाद प्रदूषण में 11 प्रतिशत की कमी आई. लेकिन लोगों ने ऑड और ईवन दोनों रजिस्ट्रेशन नंबर की कारें खरीदनी शुरू कर दिया जिससे सड़कों पर कारों की संख्या और भी बढ़ गई. जब कारों की संख्या बढ़ी तो प्रदूषण के स्तर में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई. हालत इतनी बुरी हो गई कि संयुक्त राष्ट्र ने मैक्सिको सिटी को 1992 में दुनिया का सब से प्रदूषित शहर घोषित किया. इसके बाद अधिकारियों को ये फार्मूला रद्द करना पड़ा.

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