विवादित बिल को लेकर बैकफुट पर वसुंधरा सरकार, अध्यादेश की होगी समीक्षा

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नई दिल्लीः राजस्थान में सियासी तूफान लाने वाले विवादित अध्यादेश को वसुंधरा सरकार ने विधानसभा की सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया है. सोमवार को विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए अध्यादेश दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक, 2017 को लेकर विपक्ष के हंगामे के बाद वसुंधरा राजे को बैकफुट पर जाना पड़ा. 

बताया जा रहा है कि राजे ने कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों से इस मसले पर बातचीत के बाद यह फैसला लिया. लेकिन जानकारों की माने तो इस अध्यादेश को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर मचे सियासी बवाल के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा है. 

ऐसी भी खबर है कि सोमवार शाम को सीएम वसुंधरा ने इस मामले पर चर्चा के लिए बीजेपी के कई विधायकों और बीजेपी राज्य प्रमुख को चर्चा के लिए बुलाया था. केवल विपक्ष ही नहीं बीजेपी के भी दो विधायकों ने इसे काला कानून बताया था. राजस्थान सरकार के इस अध्यादेश के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में दो याचिकाएं भी दायर हुई है.

वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोमवार को इस विधेयक के पेश होने से पहले मार्च किया था और विधानसभा में पेश किए जाते वक्त सदन से वॉकआउट किया था. मंगलवार को वसुंधरा सरका के इस फैसले के बाद बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा, 'बिल को विधान सभा की सिलेक्ट कमिटी को भेजा जाना एक स्मार्ट मूव है. राजे ने अपने लोकतांत्रिक स्वभाव का परिचय दिया है.'

Smart move by Vasundara to send the Bill to Select Committee of the Vidhan Sabha. She has demonstrated her democratic nature

— Subramanian Swamy (@Swamy39) October 24, 2017

राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में सोमवार को गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिपक्ष और बीजेपी के एक वरिष्ठ विधायक के भारी विरोध और वाकआउट के बीच दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक, 2017 सदन में पेश किया था. गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया और संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने विधेयक का विरोध कर रहे सदस्यों को हालांकि आश्वासन दिया था कि चर्चा के दौरान उनकी शंकाओं का समाधान किया जाएगा. लेकिन इन सबके बावजूद कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने अध्यक्ष कैलाश मेघवाल द्वारा विधेयक पर बोलने की अनुमति नहीं देने और विधेयक के विरोध में सदन से वाकआउट किया था.

सोमवार को विधानसभा में अध्यादेश को विधानसभा पटल पर रखे जाने के बाद भारी हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी. मंगलवार को विधानसभा में सीएम ने सोच विचार करने के बाद इसे विधानसभा की सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया है.

क्या है राज्य सरकार का अध्यादेश?
वसुंधरा राजे सरकार के इस अध्यादेश के मुताबिक राजस्थान में सेवारत एवं सेवानिवृत्त दोनों न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेट और लोकसेवकों को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बगैर ड्यूटी के दौरान कार्रवाई के लिये जांच से संरक्षित करने की मांग की गई है. आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017 गत सात सितंबर को जारी किया गया था. इस अध्यादेश के तहत राजस्थान में अब पूर्व व वर्तमान जजों, अफसरों, सरकारी कर्मचारियों और बाबुओं के खिलाफ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा.  ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी. 

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