मां को नहीं मिला राशन, 'भात-भात' पुकारते हुए बच्ची की भूख से हुई मौत

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नई दिल्लीः झारखंड के सिमडेगा जिले के एक गांव में भूख से एक बच्ची के मरने की खबर है. 11 साल की संतोष कुमारी ने पिछले कई दिनों से नहीं खाया था. संतोष अपने परिवार के साथ कारीमाटी मे रहती थी. यह सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड की पतिअंबा पंचायत का एक गांव है.  संतोष की मां कोयलीी देवी का कहना है, ''मैं चावल लेने के लिए राशन की दुकान पर गई थी लेकिन राशन वाले ने मुझे राशन देने से मना कर दिया. ''मेरी बेटी भात-भात पुकारते हुए मर गई.'' कोयलीी देवी के पास बीपीएल कार्ड था लेकिन राशन नहीं मिलता था. बताया जा रहा है कि राशन वाले ने आधार लिंक नहीं होने की वजह से उनका कार्ड कैंसिल कर दिया था. 

Jharkhand: Went to get rice but I was told that no ration will be given to me. My daughter died saying 'Bhat-bhat'-Koyli Devi, girl's mother pic.twitter.com/aRCIwcoSfL

— ANI (@ANI) October 17, 2017

भूख से बच्ची की मौत पर राज्य सरकार के खाद्य व आपूर्ति मंत्री ने कहा है कि जांच कराई जाएगी.

J'khand:11-yr-old girl allegedly died of starvation in Simdega after her family didn't receive ration undr PDS due to non-linking of Aadhaar

— ANI (@ANI) October 17, 2017

मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो गांव के राशन वाले ने पिछले आठ महीने से उन्हें राशन देना बंद कर दिया था. क्योंकि, उनका राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं था. हालांकि झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री का कहना है कि हमारी तरफ से साफ निर्देश है कि जिन लोगों का राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं है उन्हेंं राशन देने से इंकार नहीं किया जा सकता है.

Clear instructions that ration shouldn't be denied to those who haven't linked ration card with Aadhaar:Min in charge of Food&Civil Supplies pic.twitter.com/MPRTEXFheF

— ANI (@ANI) October 17, 2017

सरकार की लिस्ट में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले संतोष के परिवार के पास कोई नौकरी नहीं है, न ही इनके स्थायी आमदनी का कोई जरिया है. संतोष की मां लोगों के घर में काम करके कुछ ले आती है जिससे गुजारा होता है. पिछले कई दिनों से वह भी कहीं नहीं जा पा रही थी. पिता मानसिक रूप से बीमार है. ऐसे में पूरा परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाले सरकारी राशन पर ही निर्भर था लेकिन सरकार की औपचारिकता पूरी नहीं कर पाने के चलते इन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका. खबरों की मानें तो मिड डे मील के जरिए संतोष को खाना मिल जाता था लेकिन उन दिनों (28 सितंबर के आस-पास) दशहरे की छुट्टियों के चलते स्कूल बंद थे.  

Jharkhand: Went to get rice but I was told that no ration will be given to me. My daughter died saying 'Bhat-bhat'-Koyli Devi, girl's mother pic.twitter.com/aRCIwcoSfL

— ANI (@ANI) October 17, 2017

संतोष की मौत पर सिमडेगा के उपायुक्त मंजूनाथ ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि इस बच्ची की मौत भूख से नहीं बल्कि मलेरिया से हुई है. लेकिन इलाके की सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू ने बीबीसी को बताया कि संतोष को इलाके की एएनएम वर्कर ने 27 सितंबर (संतोष की मौत से एक दिन पहले) देखा था उसे बुखार नहीं था. तारामणि साहू ने कहा, "कोयली देवी का राशन कार्ड रद्द होने के बाद मैंने उपायुक्त के जनता दरबार मे 21 अगस्त को इसकी शिकायत की. 25 सितंबर के जनता दरबार में मैंने दोबारा यही शिकायत कर राशन कार्ड बहाल करने की मांग की. तब संतोष जिंदा थी. लेकिन उसके घऱ की हालत बेहद खराब हो चुकी थी. लेकिन, मेरी बात पर ध्यान नही दिया गया और इसके महज एक महीने के बाद संतोष की मौत हो गई."  

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