झारखंड उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की इजाजत दी

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रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने रविवार शाम एक अहम फैसले में जमशेदपुर की एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल जांच रिपोर्ट मिलने के बाद गर्भपात की इजाजत दे दी। न्यायमूर्ति आर. मुखोपाध्याय की पीठ ने रविवार की शाम रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर विशेष परिस्थितियों में नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत दे दी। साथ ही न्यायालय ने इस पूरे कार्य के व्यय का भार राज्य सरकार को वहन करने के निर्देश दिये। न्यायालय का आदेश मिलने के बाद राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने नाबालिग पीड़िता का गर्भपात कराने की तैयारी प्रारंभ कर दी है और मंगलवार को गर्भपात कराए जाने की उम्मीद बताई गई है।

गौरतलब है कि न्यायालय ने रिम्स के विशेषज्ञों की टीम का गठन किया था और नाबालिग के गर्भ में पल रहे लगभग 23 सप्ताह के भ्रूण की स्थितियों की जांच करके रिपोर्ट देने को कहा था। अदालत ने पूछा था कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात सुरक्षित ढंग से कराया जा सकता है या नहीं? उच्च न्यायालय के आज के आदेश के बाद रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक एस के चौधरी ने बताया कि पीड़ित बालिका की शल्य क्रिया से पूर्व की जाने वाली विस्तृत चिकित्सकीय जांच कल की जाएगी जिसके बाद मंगलवार को शल्यक्रिया किए जाने की संभावना है।

चौधरी स्वयं उस मेडिकल बोर्ड का नेतृत्व कर रहे हैं जिसने बच्ची की चिकित्सकीय जांच कर उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दी थी। उच्च न्यायालय की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश ने रिम्स की मेडिकल रिपोर्ट सरकारी अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र को दिखाई और न्यायालय में उपस्थित रिम्स के मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ एस के चौधरी से पीड़िता के गर्भपात के बारे में पूछा।

न्यायालय को चौधरी ने बताया कि लगभग 23 सप्ताह का हो जाने के कारण भ्रूण को नाबालिग बालिका के गर्भ से निकालना जोखिम भरा है लेकिन उनकी टीम इस काम को सफलतापूर्वक करने की पूरी कोशिश करेगी। उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता के मां-पिता को रिम्स में रहने की सुविधा दी जाए।

इससे पूर्व रविवार दिन में 11 बजे जमशेदपुर से पीडिता रिम्स पहुंची जिसके बाद मेडिकल बोर्ड ने दोपहर साढ़े बारह बजे उसकी जांच की। मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद दोपहर में अपनी रिपोर्ट तैयार की और दोपहर तीन बजे सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी गयी। न्यायालय ने पीड़िता के गर्भ से निकाले जाने वाले भ्रूण के टिशू को सुरक्षित रखने को कहा ताकि उसका डीएनए टेस्ट कराया जा सके और उसके आधार पर बलात्कार के आरोपी को सजा दी जा सके।

न्यायालय ने सरकारी अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा, उप सचिव अभिषेक श्रीवास्तव एवं डॉ. एसके चौधरी की त्वरित गति से काम करने के लिए सराहना की। इस दौरान कोर्ट में प्रार्थी के अधिवक्ता राम सुभग सिंह, सरकारी अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा, उप सचिव चिकित्सा अभिषेक श्रीवास्तव, रिम्स के डॉ. एसके चौधरी एवं अन्य अनेक अधिकारीं मौजूद थे। न्यायालय ने जमशेदपुर की एसएसपी को निर्देश दिया कि वो पीड़िता को सोमवार को सुरक्षित रिम्स पहुंचाएंगे, ताकि उसकी जांच की जा सके। पीड़िता के गर्भपात के लिए जरूरी मेडिकल सुविधा का सारा खर्च सरकार उठाएगी। अदालत ने पीड़िता को रिम्स में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रिम्स को निर्देश दिये। न्यायालय ने कहा कि गर्भपात के बाद स्वस्थ हो जाने पर एसएसपी बालिका को उसके घर पहुंचाने की व्यवस्था करेंगे।

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