मथुरा में पकड़ा गया फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज, तीन गिरफ्तार

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में पुलिस ने सेना, केंद्र और राज्य के खुफिया विभागों सहित भारत संचार निगम लिमिटेड से मिली सूचना के आधार पर रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग के पास चल रहे एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भण्डाफोड़ कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और कई इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए हैं। गिरोह का एक प्रमुख सदस्य फरार है। पुलिस के अनुसार फर्जी तरीके से निजी एक्सचेंज चलाने में इस गिरोह के कई सदस्य मेरठ तथा गाजियाबाद में भी पकड़े जा चुके हैं। ये लोग वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपीएस) ऐप के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉलों को स्थानीय बनाकर हर महीने लाखों रुपए की मोटी कमाई कर रहे थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगई ने कहा, ‘‘पकड़े गए लोग चीनी मोबाइल ऐप सर्विस प्रोवाइडर ‘क्विन्सी’ का एक विशेष इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को स्थानीय कॉल्स में तब्दील कर करोड़ों रुपये का चूना लगाते आ रहे थे।’ उन्होंने बताया कि इस गिरोह के सरगना निशांत शर्मा को मेरठ में भी ऐसे ही मामले में पकड़ा जा चुका है। वह मूलतः इलेक्ट्रानिक्स से बीटेक डिग्री धारक है। वह हरियाणा के गुरुग्राम जिले के थाना सोहना क्षेत्र के मुहल्ला खातीपाड़ा का निवासी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सेना, केंद्र सरकार तथा स्थानीय खुफिया सूत्रों से जानकारी मिल रही थी कि कोई अनधिकृत व्यक्ति या समूह निजी तौर पर एक्सचेंज का संचालन कर रहा है जिससे खास तौर पर खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिकी शहरों में कॉल कराई जा रही हैं।’’ पुलिस को इस मामले में भारत संचार निगम लिमिटेड के स्थानीय विशेषज्ञों ने भी आगाह किया था कि राजमार्ग स्थित माहेश्वरी नगर कॉलोनी के एक टॉवर से बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय कॉल हो रही हैं, जबकि उसके सापेक्ष उतना राजस्व नहीं आ रहा है।’’

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘‘इस पर इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिए उक्त मकान का पता लगाकर वहां मौजूद गिरोह सरगना निशांत शर्मा, गुरुग्राम के ही पलवल रोड निवासी अनिल बंसल तथा जहांगीरपुरी दिल्ली निवासी ध्रुव सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। निशांत को सिम उपलब्ध कराने वाला लखनऊ निवासी इनका चौथा साथी अरशद फरार है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘निशांत चीनी सॉफ्टवेयर कंपनी क्विन्सी का एजेंट है। कंपनी ने एक सॉफ्टवेयर बनाया है, जिसे वह अपने एजेंटों को देश में दे रही है। एजेंट मिनी एक्सचेंज खोलकर अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में परिवर्तित कर बात कराते हैं। इसके लिए कंपनी निशांत को पांच लाख रुपये मासिक दे रही थी।’’ 

पुलिस अधकारी ने कहा, ‘‘इस प्रकार हर माह दस-पंद्रह हजार अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में बदला जा रहा था। इंटरनेट से होने वाली ये कॉल चीनी कंपनी के सॉफ्टवेयर पर पहुंचती हैं, और फिर सॉफ्टवेयर के जरिए स्वतः लोकल कॉल में बदल जाती हैं।’’ किराए के मकान में रह रहे आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने दो सीपीयू, दो गेटवे मशीन, दो मॉडम, एक मॉनीटर, दो की बोर्ड, एक राउटर, तीन पावर स्ट्रिप, एक बैटरी, इन्वर्टर, तीन स्विच, सात केबल, छह पॉवर केबल, रिलायंस की 33 और बीएसएनल की 47 सिम बरामद की हैं।’’ पुलिस इस मामले में गिरोह की गतिविधि को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हुए इस बात की भी जांच करेगी कि कहीं इन लोगों के संबंध देश विरोधी शक्तियों के साथ तो नहीं रहे हैं।

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