तंबाकू से कैंसर ही नहीं होता, आंखों की रोशनी भी जाती है- एम्स

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एम्स के डॉक्टरों ने कहा है कि तंबाकू से न सिर्फ कैंसर होता है बल्कि लंबे समय तक इसका सेवन करने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इस विषय पर हुए कई अध्ययन से यह जाहिर हुआ है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें धूम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में मोतियाबिंद होने की आशंका बढ़ जाती है। पांच या 10 साल तंबाकू का सेवन करने से आंखों की नसें प्रभावित होती हैं जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है।

एम्स में राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. अतुल कुमार ने कहा कि अक्सर ऐसे मामलों में आंखों की रोशनी वापस नहीं आती। लोग जानते हैं कि धूम्रपान और तंबाकू चबाने से हृदय रोग और कैंसर हो सकता है लेकिन तंबाकू से आंखों की रोशनी के जाने और आंखों की अन्य समस्याओं के बारे में व्यापक रूप से नहीं जाना जाता। उन्होंने बताया कि एम्स में सालाना आंखों की रोशनी जाने के कुल मामलों में करीब पांच फीसदी तंबाकू से हुए मामले होते हैं।

डॉ. कुमार ने कहा कि एम्स केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ एक राष्ट्रीय दृष्टिहीनता सर्वेक्षण कर रहा है। इसका उद्देश्य देश में ऐसे दृष्टिहीन लोगों के बारे में आंकड़े जुटाना है। कम्युनिटी ओप्थलमोलॉजी के प्रभारी प्राध्यापक प्रवीण वशिष्ट के मुताबिक सर्वेक्षेण के लिए चुने गए 30 जिलों में 19 जिलों में आंकड़ा एकत्र करने का काम पूरा हो गया है। सर्वेक्षण अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2010 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में विश्व के 20 फीसदी दृष्टिहीन लोग हो सकते हैं।

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