राम रहीम के बाद जाट अारक्षण फैसले पर अब सबकी नजर

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हरियाणाः राम रहीम को सीबीअाई कोर्ट द्वारा सजा सुनाए अाज पूरा एक हफ्ता हो गया है। पूरे एक हफ्ते के बाद अब हाईकोर्ट के एक फैसले पर सबकी नजर टिकी हुई है। राम रहीम पर फैसले के बाद हिंसा हुई थी और अब ये मामला भी संवेदनशील है। अापको जाट अारक्षण में हुई हिंसा तो याद ही होगी। याद कैसे न हो उस हिंसा में अरबों का नुकसान और कई जाने गई थी। वह तो राम रहीम के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा से भी कहीं ज्यादा थी।

फिर सरकार द्वारा जाटों को अारक्षण का दिलासा दिया गया, तब जाकर यह मुद्दा शांत हुअा था। अाज उसी जाटों समेत अन्य 6 जातियों के अारक्षण पर अपना फैसला सुनाएगी। प्रदेश सरकार ने जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में लाते हुए 10 फीसद आरक्षण दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

गृह सचिव रामनिवास ने अपने निवास पर अफसरों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। पुलिस व प्रशासन अलर्ट है। जाट आरक्षण को लेकर फैसला यदि जाटों के पक्ष में नहीं आया तो एक बार फिर टेंशन बढ़ सकती है। सीएम खट्टर ने राज्य के गृह सचिव रामनिवास और पुलिस महानिदेशक से सुरक्षा बंदोबस्त की जानकारी ली। गृह सचिव ने डीजीपी व सीआइडी प्रमुख समेत विभिन्न अधिकारियों के साथ अपने घर पर ही बैठक लेकर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की तथा संबंधित अफसरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

क्या था जाट अारक्षण अांदोलन?
हरिणाया जल रहा था, दिल्ली प्यासी हो गई थी, उत्तर प्रदेश ठहर गया और राजस्थान, पंजाब और हिमाचल की रफतार धीमी पड़ गई थी। यह सब जाट आंदोलन की देन था।  

अाखिर कौन हैं जाट और क्या है इनकी मांगे? जाट हरियाणा के किसानों की एक जाति है। इस जाति के तमाम लोग उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भी रहते हैं। हालांकि ज्यादातर जाट हरियाणा में ही रहते हैं। और हरियाणा की राजनीति में इनका असर हमेशा दिखाई देता है। जाट समुदाय की मांग है कि सरकारी नौकरियों और श‍िक्षण संस्थानों में उन्हें ओबीसी कैटेगरी के तहत आरक्षण प्रदान किया जाये।

इसी मांग के चलते समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। 1991 में गुरनाम सिंह कमीशन की एक रिपोर्ट आयी, जिसके तहत जाट समुदाय को पिछड़ी जाति में रखा गया। उनके साथ सात अन्य समुदायों के लोगों को भी पिछड़ा घोष‍ित कर दिया गया। लेकिन भजन लाल सरकार ने उस अध‍िसूचना को वापस ले लिया, जिसके अंतर्गत जाटों को पिछड़ा वर्ग में रखा जाना था। दो नई कमेटियां बनीं, लेकिन दोनों ने जाट समुदाय को पिछड़ी जाति में शामिल नहीं किया। साल 2004 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सत्ता में आये और उन्होंने केंद्र से जाटों को आरक्षण देने की मांग कई बार की।

अाज जाटों समेत अन्य 6 जातियों के अारक्षण पर हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। अगर तो फैसला जाटों के हक में अाया तो ठिक अगर एेसा नहीं होगा तो फिर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रदेश की खट्टर सरकार के लिए राम रहीम के बाद यह एक और बड़ी चुनौती है।

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