99 प्रतिशत नोट बैंको में वापिस, कहां गया कालाधन ?

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नई दिल्लीः नोटबंदी को किये हुए कुल 9 महीने का वक्त हो गया। आखिरकार आरबीआई ने आंकड़े जारी कर ही दिये, जिसका देश को काफी समय से इंतजार था, लेकिन आंकड़े आने के साथ ही विपक्ष की जुबान खुल गई और मोदी सरकार एक बार फिर निशाने पर आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के दौरान बैन किए गए 1000 रुपये के पुराने नोटों में से करीब 99 फीसदी बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए हैं। 1000 रुपये के 8.9 करोड़ नोट (1.3 फीसदी) नहीं लौटे हैं। पिछले साल नवंबर में लागू की गई नोटबंदी के दौरान देश में प्रचलन में रहे 15.44 लाख करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट में से 15.28 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट कर आ गए हैं तो फिर सवाल यह उठता है कि आखिर कहां गया कालाधन... 

नोटबंदी के समय बड़े बड़े दावे करने वाली मोदी सरकार पर अब कड़ी टिप्पणियां हो रही है। लोगों को एक मीठी गोली के रुप में दी गई नोटबंदी को आरबीआई द्धारा जारी किये गए आंकड़ों ने कड़वा कर दिया है।

अब विपक्ष मोदी सरकार को इन्हीं आंकड़ो के आधार पर घेर रहा है। आंकड़े जारी होने के बाद से ही कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर हो चुकी है। यहां तक कि पूर्व वित्त मंत्री पी.चिंदबरम ने तो यहां तक कह दिया कि आप लोगों को शर्म आनी चाहिए।  सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी, कई जाने-माने अर्थशास्त्री नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार को तंज कस रहे हैं। 

बीजेपी की सफाई

इसी बीच भाजपा भी अपना बचाव करने में लगी हुई है। अरुण जेटली का कहना है कि नोटबंदी के बाद उसके संबंध में कुछ लोग टिप्पणी कर रहे हैं कि नोटबंदी का एक मात्र उद्देश्य ये था कि लोग पैसा जमा ना कराएं और पैसा जब्त हो जाएगा। जिन लोगों ने जीवन में कभी काले धन के खिलाफ जंग नहीं लड़ी, वो शायद इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य समझ नहीं पाए। ये किसी का पैसा जब्त करने का उद्देश्य नहीं था। बैंकिंग सिस्टम में पैसा आ जाए तो इसका मतलब ये नहीं कि वो पूरा पैसा वैध है। इस पैसे के खिलाफ आयकर विभाग पूरी जांच करता है। यही कारण है लाखों लोगों को नोटिस पर डाला गया है।  जिसका एक प्रत्यक्ष असर हुआ है कि डायरेक्ट टैक्स बेस बढ़ा है  उससे जीएसटी का प्रभाव भी बढ़ा है।

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