गोरखपुर मामले में उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में पिछले 10-11 अगस्त की रात को संदिग्ध हालात में भर्ती मरीज बच्चों की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य समेत कई वरिष्ठ जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश की है। समिति ने गत 20 अगस्त को सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा, ऑक्सीजन प्रभारी/ एनेस्थिसिया बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर सतीश तथा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम बोर्ड के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉक्टर कफील खान तथा मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्तिकर्ता कंपनी पुष्पा सेल्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की सिफारिश की है।

इसके अलावा समिति ने डॉक्टर राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला, मेडिकल कॉलेज के लेखा विभाग के कर्मचारियों तथा चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत कार्यवाही की संस्तुति की है। समिति ने गैर-जिम्मेदाराना आचरण, कर्तव्यहीनता और कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रतिकूल रवैया अपनाने के लिए डॉक्टर राजीव मिश्रा, डॉक्टर सतीश, डॉक्टर कफील खान, गजानन जायसवाल एवं सहायक लेखाकार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की सिफारिश भी की है।

इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में औषधि तथा रसायनों की आपूर्ति की पिछले तीन वर्षों की सीएजी से विशेष ऑडिट कराने तथा डॉक्टर कफील खान द्वारा गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के समक्ष तथ्यों को छुपाकर शपथपत्र दाखिल करने और इंडियन मेडिकल काउंसिल के नियमों के विपरीत काम करने के लिए आपराधिक कार्यवाही किए जाने की सिफारिश भी की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए सभी दोषी अधिकारीयों तथा कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही करने के आदेश देते हुए कहा है कि दोषी अधिकारियों तथा कर्मचारियों को किसी भी दशा में बख्शा न जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। समिति ने इस प्रकरण में दोषी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित करते हुए भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना होने देने तथा व्यवस्था में सुधार के लिए भी सुझाव दिए हैं।

मालूम हो कि गत 10 और 11 अगस्त को गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध हालात में 30 बच्चों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री ने 12 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। इसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव आलोक कुमार, वित्त विभाग के सचिव मुकेश मित्तल तथा संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर हेमचंद्र भी शामिल थे। इस समिति को पांच दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

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