रजिस्ट्री पर आक्षेप लगाने वाले वकील पर एक माह की रोक लगी

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उच्चतम न्यायालय ने एक वकील पर ‘‘एड्वोकेट ऑन रिकॉर्ड’’ (एओआर) के तौर पर प्रैक्टिस करने पर आज एक माह की रोक लगा दी। प्रधान न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अगुवाई वाली एक पीठ ने वकील के खिलाफ यह फैसला उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री पर एक मामले को सूचीबद्ध करने में कथित तौर पर आक्षेप लगाने को लेकर दिया। इस पीठ में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एसके कौल भी हैं।

व्यवस्था देते हुए पीठ ने कहा ‘‘हम अवमानना के नोटिस पर आगे बढ़ने के इच्छुक नहीं हैं लेकिन अवमानना करने वाले को एक माह तक एओआर के तौर पर प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं होगी।’’ वकील ने एक मामले को सूचीबद्ध किए जाने को लेकर उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री पर आरोप लगाए थे। अधिवक्ता मोहित चौधरी ने सात अप्रैल को प्रधान न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाया और आरोप लगाया कि इस मामले को उसी दिन सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था लेकिन ‘‘छेड़छाड़ के जरिये’’ इसे एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया गया।

वकील ने सात अप्रैल को पीठ के समक्ष कहा कि यह मामला एक नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना था लेकिन रजिस्ट्री ने इसे एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया जिसकी जरूरत नहीं थी। चौधरी एक झुग्गी पुनर्वास के मामले में एक कंपनी के लिए पेश हुए थे और यह मामला न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की विशेष पीठ के समक्ष सात अप्रैल को सूचीबद्ध हुआ था। यह मामला छह अप्रैल को नियमित पीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था लेकिन बाद में इसे पूरक सूची में डाल कर न्यायमूर्ति मिश्रा की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ के समक्ष रखा गया क्योंकि 31 मार्च को दिए गए एक न्यायिक आदेश में कहा गया था कि मामले को उस पीठ के समक्ष रखा जाए जिसने इसकी सुनवाई की है।

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