दार्जीलिंग आंदोलन के कारण मौसम विभाग पर पड़ रहा असर

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कोलकाता: पृथक गोरखा लैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग की पहाड़ियों में पिछले दो माह से चल रहे आंदोलन के कारण मौसम संबंधी जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया ठप्प-सी हो गई है। पहाड़ियों में मौजूद मौसम विभाग का स्टेशन तापमान या बारिश संबंधी जानकारी दर्ज नहीं कर पा रहा है क्योंकि अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण स्टेशन के कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे। इसका असर प्रशासन की ओर से बनाई जाने वाली योजना और राहत उपलब्ध करवाने की तैयारियों पर पड़ रहा है क्योंकि उसे मौजूदा मानसून में होने वाली बारिश की असली मात्रा की जानकारी नहीं मिल रही है।

पिछले कुछ दिन में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, दार्जीलिंग और कालिमपोंग में बहुत भारी से भारी मात्रा में बारिश हो रही है। लेकिन यहां क्षेत्रीय मौसम विभाग के पास दार्जिलिंग में बारिश की मात्रा संबंधी आंकड़े ही नहीं हैं। पश्चिम बंगाल के सिंचाई मंत्री राजीब बनर्जी ने बताया, ‘‘हमें दार्जिलिंग में होने वाली बारिश का आधिकारिक डेटा नहीं मिल रहा। इससे वहां बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारी प्रभावित हो रही है।’’

उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ पहाड़ी क्षेत्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं बल्कि मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पहाड़ों से होकर आने वाले पानी से मैदानी इलाकों में बाढ़ आ जाती है।  मंत्री ने कहा, ‘‘यहां ऐसी स्थिति इसलिए ऐसी हो गई है क्योंकि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में पहाडिय़ों में चल रहे आंदोलन के कारण राज्य सरकार के कर्मचारी दफ्तर नहीं जा पा रहे हैं।’’ मौसम विभाग उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल कर क्षेत्र के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान उपलब्ध करवा रहा है लेकिन वह तापमान या बारिश संबंधी डेटा नहीं दे पा रहा। यह आंकड़े स्थानीय मौसम स्टेशन पर ही एकत्र किए जाते हैं।

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