दो दिन पहले यात्रा पूरी कर चुके थे पीड़ित, सुरक्षा की परवाह नहीं की

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शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में सोमवार रात आतंकी हमले के शिकार तीर्थयात्रियों से भरी बस के चालक और इसके यात्रियों ने गैरजिम्मेदाराना कदम उठाया। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई जबकि 32 घायल हुए। अधिकारियों ने कहा कि बस न तो अमरनाथ श्राइन बोर्ड में पंजीकृत थी और ना ही सुरक्षा मानकों का पालन कर रही थी जो कि आतंकी खतरे को देखते हुए तीर्थयात्रा के लिए अनिवार्य है।

प्राथमिक जानकारियों के आधार पर जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि गुजरात की पंजीकरण संख्या जीजे 09 जेड 9976 वाली बस में सवाल लोगों ने यात्रा दो दिन पहले पूरी कर ली थी और तब से वे जम्मू और पहलगाम के बीच के अमरनाथ यात्रा के वाहन वाले मार्ग से हटकर श्रीनगर में थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर में संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बावजूद बस रात में जम्मू जा रही थी जिसकी अनुमति नहीं थी क्योंकि इससे वाहनों पर आतंकी हमले की आशंका होती है।

अधिकारियों ने कहा कि बस पर रात करीब आठ बजकर 20 मिनट पर अनंतनाग जिले के खानाबल के पास आतंकवादियों ने गोलियां चलाई थीं। इस घटना से एक घंटे पहले श्रीनगर जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों द्वारा गश्ती बंद हो जाती है। अधिकारियों ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रहे सभी वाहनों को काफिले में जाते वक्त सुरक्षा कवर दिया जाता है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को इस बस के जाने के बारे में कोई सूचना नहीं थी। पहलगाम से जम्मू की तरफ जाने वाले वाहनों का सामान्य रूप से समय पूर्वान्ह का होता है क्योंकि अधिकारी सुनिश्चित करते हैं कि वे दिन में एक बजे तक कश्मीर छोड़ दें। अधिकारियों ने कहा कि इस घटना को देखते हुए सुरक्षा उपायों की फिर से समीक्षा की जाएगी।

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